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हनुमान जन्मोत्सव : मंदिर....जिसे स्वयं तुलसीदास जी ने स्थापित किया

वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल संकट मोचन हनुमान मंदिर हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर आस्था, भक्ति और उल्लास का केंद्र बना हुआ है। मंदिर परिसर में इस दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है । देश-विदेश से भक्त हनुमान जी के दर्शन कर अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति और सुख-शांति की कामना करने जाएंगे। “संकट मोचन” नाम का अर्थ ही है — संकटों को हरने वाले । मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरती है।

 

मंदिर निर्माण और महत्व

 

इस मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी में संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास ने की थी, जो रामचरितमानस और हनुमान चालीसा के रचयिता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर तुलसीदास को हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए थे, जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया। यही कारण है कि यह मंदिर हनुमान और राम भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।

 

मंदिर के गर्भगृह में हनुमान जी की मूर्ति को सिंदूर और गेंदे के फूलों से सजाया जाता है। मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ रहती है। इन दिनों भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और प्रसाद, फूल व दीप अर्पित करते हैं। वहीं, हनुमान जन्मोत्सव पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।

 

मांगलिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

 

संकट मोचन मंदिर सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां हर वर्ष “संकट मोचन संगीत समारोह” का आयोजन होता है, जिसमें देश के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत और नृत्य कलाकार भाग लेते हैं। यह आयोजन भक्ति और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है और वाराणसी की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है। इस बार इसका 103वां पड़ाव है जो 6 अप्रैल को शुरू हो रहा है और 11 अप्रैल तक चलेगा । इस बार इसमें करीब डेढ़ सौ कलाकार हिस्सा लेंगे जिनमें से 15 पद्म पुरस्कार से सम्मानित हैं । इसके अलावा करीब 21 नवोदित कलाकारों को भी प्रस्तुति का मौका मिलेगा। इतना ही नहीं 14 मुस्लिम कलाकार भी होंगे जो अलग-अलग दिन संकट मोचन दरबार में अपनी प्रस्तुति देंगे। यह परंपरा सालों से चली आ रही है । काशी का एकमात्र ऐसा दरबार है जहां मजहब की दीवार भी टूट जाती है । बताते चलें कि साल 2015 में पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली भी आये थे ।

 

ध्वज यात्रा और मंदिर का विशेष महत्व

 

हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर संकट मोचन मंदिर से जुड़ी भव्य ध्वज यात्रा इस उत्सव को और भी खास बना देती है। इस वर्ष करीब 1 लाख छोटे-बड़े ध्वज तैयार किए गए हैं। 2 अप्रैल की सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ महाआरती के बाद वाराणसी के भीखापुर से यात्रा की शुरुआत होगी और यह यात्रा नेवादा, सुंदरपुर, नरिया, बीएचयू और लंका होते हुए संकट मोचन मंदिर पहुंचकर समाप्त होगी।

 

इस यात्रा में 3 किलोमीटर से अधिक लंबी भक्तों की कतार देखने को मिलेगी। श्रद्धालु नंगे पांव हाथों में ध्वज लेकर मंदिर तक पहुंचेंगे और हनुमान जी को अर्पित करेंगे। इस यात्रा में 1100 हनुमान भक्त 1100 गदा लेकर एक साथ चलेंगे, जो शक्ति और भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगा।

 

इसके साथ ही 60 फीट लंबे रथ पर भगवान श्रीराम की भव्य झांकी सजाई जाएगी और पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय रहेगा। अनुमान है कि इस यात्रा में 30 हजार से अधिक लोग शामिल होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी होंगी। यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा। साथ ही, मंदिर में हनुमान जी को 501 किलो लड्डू का भोग लगाया जाएगा, जिसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

 

अस्सी क्षेत्र के पास स्थित और शांत वातावरण से घिरा संकट मोचन हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का अटूट केंद्र बना हुआ है। हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर यहां उमड़ रही भीड़ हनुमान जी के प्रति लोगों की गहरी और अटूट भक्ति दर्शाती है।

 

:- वर्तिका श्रीवास्तव

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हनुमान जन्मोत्सव : मंदिर....जिसे स्वयं तुलसीदास जी ने स्थापित किया

वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल संकट मोचन हनुमान मंदिर हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर आस्था, भक्ति और उल्लास का केंद्र बना हुआ है। मंदिर परिसर में इस दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है । देश-विदेश से भक्त हनुमान जी के दर्शन कर अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति और सुख-शांति की कामना करने जाएंगे। “संकट मोचन” नाम का अर्थ ही है — संकटों को हरने वाले । मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरती है।

 

मंदिर निर्माण और महत्व

 

इस मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी में संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास ने की थी, जो रामचरितमानस और हनुमान चालीसा के रचयिता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर तुलसीदास को हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए थे, जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया। यही कारण है कि यह मंदिर हनुमान और राम भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।

 

मंदिर के गर्भगृह में हनुमान जी की मूर्ति को सिंदूर और गेंदे के फूलों से सजाया जाता है। मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ रहती है। इन दिनों भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और प्रसाद, फूल व दीप अर्पित करते हैं। वहीं, हनुमान जन्मोत्सव पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।

 

मांगलिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

 

संकट मोचन मंदिर सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां हर वर्ष “संकट मोचन संगीत समारोह” का आयोजन होता है, जिसमें देश के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत और नृत्य कलाकार भाग लेते हैं। यह आयोजन भक्ति और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है और वाराणसी की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है। इस बार इसका 103वां पड़ाव है जो 6 अप्रैल को शुरू हो रहा है और 11 अप्रैल तक चलेगा । इस बार इसमें करीब डेढ़ सौ कलाकार हिस्सा लेंगे जिनमें से 15 पद्म पुरस्कार से सम्मानित हैं । इसके अलावा करीब 21 नवोदित कलाकारों को भी प्रस्तुति का मौका मिलेगा। इतना ही नहीं 14 मुस्लिम कलाकार भी होंगे जो अलग-अलग दिन संकट मोचन दरबार में अपनी प्रस्तुति देंगे। यह परंपरा सालों से चली आ रही है । काशी का एकमात्र ऐसा दरबार है जहां मजहब की दीवार भी टूट जाती है । बताते चलें कि साल 2015 में पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली भी आये थे ।

 

ध्वज यात्रा और मंदिर का विशेष महत्व

 

हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर संकट मोचन मंदिर से जुड़ी भव्य ध्वज यात्रा इस उत्सव को और भी खास बना देती है। इस वर्ष करीब 1 लाख छोटे-बड़े ध्वज तैयार किए गए हैं। 2 अप्रैल की सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ महाआरती के बाद वाराणसी के भीखापुर से यात्रा की शुरुआत होगी और यह यात्रा नेवादा, सुंदरपुर, नरिया, बीएचयू और लंका होते हुए संकट मोचन मंदिर पहुंचकर समाप्त होगी।

 

इस यात्रा में 3 किलोमीटर से अधिक लंबी भक्तों की कतार देखने को मिलेगी। श्रद्धालु नंगे पांव हाथों में ध्वज लेकर मंदिर तक पहुंचेंगे और हनुमान जी को अर्पित करेंगे। इस यात्रा में 1100 हनुमान भक्त 1100 गदा लेकर एक साथ चलेंगे, जो शक्ति और भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगा।

 

इसके साथ ही 60 फीट लंबे रथ पर भगवान श्रीराम की भव्य झांकी सजाई जाएगी और पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय रहेगा। अनुमान है कि इस यात्रा में 30 हजार से अधिक लोग शामिल होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी होंगी। यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा। साथ ही, मंदिर में हनुमान जी को 501 किलो लड्डू का भोग लगाया जाएगा, जिसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।

 

अस्सी क्षेत्र के पास स्थित और शांत वातावरण से घिरा संकट मोचन हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का अटूट केंद्र बना हुआ है। हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर यहां उमड़ रही भीड़ हनुमान जी के प्रति लोगों की गहरी और अटूट भक्ति दर्शाती है।

 

:- वर्तिका श्रीवास्तव