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जोधपुर का ओम बन्ना मंदिर, जहां ‘बुलेट बाइक’ की होती है पूजा

राजस्थान के जोधपुर में स्थित ओम बन्ना मंदिर में किसी भगवान की नहीं बल्कि बुलेट बाइक की होती है पूजा। यहां की विशेष मान्यता है कि जो व्यक्ति यहां पर पूजा करता है उसे सड़क दुर्घटना और हादसों से मुक्ति मिलती है। साथ ही उनकी मनोकामना भी पूर्ण होती हैं। इसे बुलेट मंदिर भी कहा जाता है।

 

ओम बन्ना मंदिर की विशेषता

 

यूं तो सभी मंदिरों में भगवान की पत्थर की मूर्ति की पूजा होती है लेकिन यहां ओम बन्ना की मूर्ति और उनकी बाइक की पूजा होती है । ऐसी मान्यताएं हैं कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा करने आता है, उसे सड़क दुर्घटना या हादसों से मुक्ति मिल जाती है । यहां लोग बुलेट बाइक की पूजा में नारियल और फूल के साथ ही मदिरा भी चढ़ाते हैं।

 

मंदिर का अनोखा इतिहास

 

राजस्थान जोधपुर हाईवे के पास बना यह मंदिर ओम बन्ना मंदिर व बुलेट बाइक के नाम से प्रसिद्ध है. मंदिर के ठीक पीछे एक RNJ 7773 नंबर की बुलेट बाइक सजा कर रखी हुई है । कहा जाता है कि यह बाइक कभी ओम बन्ना नाम के नौजवान की हुआ करती थी, जिनकी एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार 2 दिसंबर 1988 को 25-26 साल के ओम बन्ना अपनी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट (नंबर 7773) से ससुराल से चोटिला गांव की तरफ आ रहे थे. तभी बीच रास्ते पाली से रोहट के बीच हादसे में उनकी बाइक का बैलेंस बिगड़ा और बुलेट पेड़ से टकरा गई. मौके पर ही ओम सिंह राठौड़ की मौत हो गई। जिसके बाद पुलिस उनकी मोटरसाइकिल को थाने ले आई थी।

 

कहते हैं कि सुबह सूर्य निकलने से पहले ही ये बाइक अपने आप स्टार्ट होकर हादसे वाली जगह चली जाती थी, जहां ओम बन्ना की मृत्यु हुई थी। ये सिलसिला लगातार होने लगा, जिससे परेशान होकर पुलिसवालों ने इस बाइक को चेन-तालों से बांधकर रखा और बाइक का पेट्रोल तक निकाल दिया। लेकिन बाइक हर बार रहस्यमयी तरीके से उसी स्थान पर वापस चली जाती थी। ओम बन्ना के पिता ठाकुर जोगसिंह राठौड़ ने जनभावना को देखते उस जगह चबूतरा बनवाकर बाइक को रख दिया। यह बुलेट बाइक साल 1988 से यहां रखी हुई है। सालों पुराने इस स्थान के प्रति धीरे-धीरे लोगों की गहरी आस्था जुड़ने लगी और उनकी ख्याति एक लोक देवता के रूप में हो गई । आज भी राजस्थान के कोने-कोने से लोग इस स्थान पर ओम बन्ना की  प्रतिमा और उनकी बाइक पर फूल-माला और पैसा चढ़ाते हैं। जोधपुर-पाली राजमार्ग पर यात्रा करने वाले कई लोग ओम बन्ना मंदिर में रुककर प्रार्थना अवश्य करते हैं। उनका मानना ​​है कि इससे उनकी यात्रा सुरक्षित होती है।

 

साथ ही राजस्थान के इस मंदिर को लेकर लोगों में ऐसी आस्था है कि कई लोगों के वाहनों पर भी ‘ओम बन्ना’ लिखा हुआ दिख जाता है। जो लोग नया वाहन खरीदते हैं, वो भी दर्शन करने के लिए ओम बन्ना मंदिर के दर्शन करने जरूर आते हैं। कहते हैं कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में दर्शन करने आता है, ओम बन्ना उसकी रक्षा करते हैं।

 

:- लता रानी

 

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जोधपुर का ओम बन्ना मंदिर, जहां ‘बुलेट बाइक’ की होती है पूजा

राजस्थान के जोधपुर में स्थित ओम बन्ना मंदिर में किसी भगवान की नहीं बल्कि बुलेट बाइक की होती है पूजा। यहां की विशेष मान्यता है कि जो व्यक्ति यहां पर पूजा करता है उसे सड़क दुर्घटना और हादसों से मुक्ति मिलती है। साथ ही उनकी मनोकामना भी पूर्ण होती हैं। इसे बुलेट मंदिर भी कहा जाता है।

 

ओम बन्ना मंदिर की विशेषता

 

यूं तो सभी मंदिरों में भगवान की पत्थर की मूर्ति की पूजा होती है लेकिन यहां ओम बन्ना की मूर्ति और उनकी बाइक की पूजा होती है । ऐसी मान्यताएं हैं कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा करने आता है, उसे सड़क दुर्घटना या हादसों से मुक्ति मिल जाती है । यहां लोग बुलेट बाइक की पूजा में नारियल और फूल के साथ ही मदिरा भी चढ़ाते हैं।

 

मंदिर का अनोखा इतिहास

 

राजस्थान जोधपुर हाईवे के पास बना यह मंदिर ओम बन्ना मंदिर व बुलेट बाइक के नाम से प्रसिद्ध है. मंदिर के ठीक पीछे एक RNJ 7773 नंबर की बुलेट बाइक सजा कर रखी हुई है । कहा जाता है कि यह बाइक कभी ओम बन्ना नाम के नौजवान की हुआ करती थी, जिनकी एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार 2 दिसंबर 1988 को 25-26 साल के ओम बन्ना अपनी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट (नंबर 7773) से ससुराल से चोटिला गांव की तरफ आ रहे थे. तभी बीच रास्ते पाली से रोहट के बीच हादसे में उनकी बाइक का बैलेंस बिगड़ा और बुलेट पेड़ से टकरा गई. मौके पर ही ओम सिंह राठौड़ की मौत हो गई। जिसके बाद पुलिस उनकी मोटरसाइकिल को थाने ले आई थी।

 

कहते हैं कि सुबह सूर्य निकलने से पहले ही ये बाइक अपने आप स्टार्ट होकर हादसे वाली जगह चली जाती थी, जहां ओम बन्ना की मृत्यु हुई थी। ये सिलसिला लगातार होने लगा, जिससे परेशान होकर पुलिसवालों ने इस बाइक को चेन-तालों से बांधकर रखा और बाइक का पेट्रोल तक निकाल दिया। लेकिन बाइक हर बार रहस्यमयी तरीके से उसी स्थान पर वापस चली जाती थी। ओम बन्ना के पिता ठाकुर जोगसिंह राठौड़ ने जनभावना को देखते उस जगह चबूतरा बनवाकर बाइक को रख दिया। यह बुलेट बाइक साल 1988 से यहां रखी हुई है। सालों पुराने इस स्थान के प्रति धीरे-धीरे लोगों की गहरी आस्था जुड़ने लगी और उनकी ख्याति एक लोक देवता के रूप में हो गई । आज भी राजस्थान के कोने-कोने से लोग इस स्थान पर ओम बन्ना की  प्रतिमा और उनकी बाइक पर फूल-माला और पैसा चढ़ाते हैं। जोधपुर-पाली राजमार्ग पर यात्रा करने वाले कई लोग ओम बन्ना मंदिर में रुककर प्रार्थना अवश्य करते हैं। उनका मानना ​​है कि इससे उनकी यात्रा सुरक्षित होती है।

 

साथ ही राजस्थान के इस मंदिर को लेकर लोगों में ऐसी आस्था है कि कई लोगों के वाहनों पर भी ‘ओम बन्ना’ लिखा हुआ दिख जाता है। जो लोग नया वाहन खरीदते हैं, वो भी दर्शन करने के लिए ओम बन्ना मंदिर के दर्शन करने जरूर आते हैं। कहते हैं कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में दर्शन करने आता है, ओम बन्ना उसकी रक्षा करते हैं।

 

:- लता रानी