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कल्पेश्वर महादेव अर्थात “काल के स्वामी” और “मृत्यु व समय के अधिपति”। भगवान शिव का वह दिव्य धाम, जहाँ उनके जटा स्वरूप की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर न केवल पंचकेदार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि वह तपोभूमि भी है जहां महर्षि दुर्वासा और देवराज इंद्र ने कठोर तपस्या की थी। साथ ही इस पवित्र स्थान का संबंध समुद्र मंथन की कथा से भी जोड़ा जाता है। पंचकेदार में कल्पेश्वर महादेव ही एकमात्र ऐसा धाम है, जिसके कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरे वर्ष खुले रहते हैं। आइए जानते हैं इस अद्भुत मंदिर की विशेषताओं और मान्यताओं के बारे में।
कहां स्थित है यह मंदिर?
उत्तराखंड के चमोली जिले में हेलंग गांव से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर घाटी में स्थित है पंचकेदार का अंतिम पड़ाव- कल्पेश्वर महादेव का धाम। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2134 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। कल्पेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचने का मार्ग श्रद्धालुओं के लिए काफी सुविधाजनक माना जाता है। पंचकेदार में यह एकमात्र ऐसे केदार है, जहां तक मोटर मार्ग द्वारा भी पहुंचा जा सकता है।
क्या हैं मंदिर की विशेषताएं?

