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बुलंदशहर जिले के छतारी क्षेत्र के गांव चौढ़ेरा में स्थित मां विचित्रा देवी का मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। करीब 500 साल से भी अधिक पुराने इस मंदिर में रोजाना हजारों भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है, यही वजह है कि दूर-दराज से भी लोग यहां खिंचे चले आते हैं।
मंदिर का इतिहास और मान्यता
विचित्रा देवी मंदिर को ‘चौढ़ेरे वाली मइया’ के नाम से भी जानते है। मंदिर के पुरोहित कन्हैया लाल के अनुसार, मां विचित्रा देवी का यह मंदिर वर्षों पुराना है, लेकिन इसका वर्तमान भव्य स्वरूप नई दिल्ली के धनीराम गुरु ने वर्ष 1997 में दिलवाया था । उस समय उनके जीवन में कठिनाइयां चल रही थीं और कोई भी कार्य सफल नहीं हो रहा था। कहा जाता है कि मां विचित्रा देवी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए, जिसके बाद उनके सभी कार्य सफल होने लगे। अपनी मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने मंदिर को विशाल रूप देने का संकल्प लिया और उसका पुनर्निर्माण कराया। तभी से इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई और यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।
नवरात्रि में लगता है भव्य लक्खी मेला
मां विचित्रा देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इन नौ दिनों में भव्य “लक्खी मेला” आयोजित किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेला केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है। आसपास के गांवों और शहरों से लोग परिवार सहित यहां आते हैं और माता के दर्शन के साथ-साथ मेले का आनंद भी लेते हैं।
मंदिर की विशेषताएं
इन्हें 'विचित्र' इसलिए कहते हैं क्योंकि इनके दर्शन और पूजा का तरीका अनोखा है, जहाँ माता के दर्शन के बाद हवनकुंड में आहुति देने से ही पूजा पूर्ण मानी जाती । मान्यता है कि मां के दर्शन करने के बाद यदि भक्त हवनकुंड में नारियल, लौंग, इलायची, जायफल और अन्य सामग्री अर्पित करते हैं, तो उनके दर्शन पूर्ण माने जाते हैं। यही पूजा पद्धति सबसे बड़ी विशेषता है । यहां मां विचित्रा देवी की पूजा के साथ-साथ बाबा हाथीमान की पूजा करना भी आवश्यक माना जाता है। मंदिर के पीछे स्थित क्षेत्र को बाबा हाथीमान का स्थान कहा जाता है और श्रद्धालु वहां भी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं।
कैसे पहुंचें मंदिर

