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उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में पूजे जाने वाले गोलू देवता को स्थानीय लोग भगवान शिव का अवतार मानते हैं। मान्यता के अनुसार, उनके भाई कालवा देवता को भैरव और गढ़ देवी को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। यही कारण है कि इन तीनों देवताओं का क्षेत्र में विशेष धार्मिक महत्व है। कई गांवों में गोलू देवता को इष्ट या कुल देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें “न्याय के देवता” के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि वे सच्चे मन से की गई प्रार्थना को अवश्य सुनते हैं और न्याय दिलाते हैं।
कौन हैं गोलू देवता?
लोककथाओं के अनुसार, गोलू देवता घोड़े पर सवार होकर अपने क्षेत्र में भ्रमण करते थे और लोगों की समस्याएं सुनते थे। इस परंपरा को “गोलू दरबार” कहा जाता था, जहां वे जनता की शिकायतों को सुनकर उनका समाधान करते थे। गोलू देवता का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण माना जाता है। लोगों के प्रति उनके समर्पण और सेवा भावना के कारण उन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन किया और अपना जीवन समाज की भलाई के लिए समर्पित कर दिया। इसी वजह से आज भी लोग उन्हें सच्चे दिल से पूजते हैं और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उनकी शरण में जाते हैं।
घोड़ाखाल में स्थित गोलू देवता मंदिर
नैनीताल के पास भवाली से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर, सैनिक स्कूल के पीछे पहाड़ी की चोटी पर स्थित घोड़ाखाल का गोलू देवता मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस मंदिर को “गोल्ज्यू मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। “घोड़ाखाल” नाम का शाब्दिक अर्थ है “घोड़ों के लिए पानी का तालाब”। यह स्थान एक सुंदर पहाड़ी गांव में स्थित है, जो प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व दोनों के लिए जाना जाता है। ऊंचाई पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, जो अपने आप में एक खास अनुभव होता है।
घोड़ाखाल मंदिर का महत्व
घोड़ाखाल में स्थित गोलू देवता मंदिर में गोल्ज्यू देवता की सफेद घोड़े पर सवार मूर्ति विराजमान है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। लोकमान्यता है कि पत्र (अर्जी) लिखकर बांधने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि यहां लोग अपनी समस्याएं और इच्छाएं कागज पर लिखकर गोलू देवता के दरबार में प्रस्तुत करते हैं। जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वे आभार स्वरूप मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं।
घोड़ाखाल मंदिर को “घंटियों का मंदिर” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां हजारों घंटियां बंधी हुई हैं। माना जाता है कि चढ़ाई जाने वाली घंटी का आकार भी उस मनोकामना की पूर्ति के अनुसार होता है। मंदिर परिसर में कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं। साल भर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है, लेकिन नवरात्रि और श्रावण मास के दौरान यहां विशेष रूप से भारी संख्या में तीर्थयात्री और पर्यटक पहुंचते हैं।
एक विशेष मान्यता यह भी है कि शादी के बाद यदि नवविवाहित जोड़ा यहां दर्शन के लिए आता है, तो उनका रिश्ता सात जन्मों तक मजबूत बना रहता है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। यही कारण है कि कई लोग इस मंदिर में विवाह करने भी आते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित गोलू देवता मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं। घोड़ाखाल का गोलू देवता मंदिर एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहां से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं जाता।

