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17 मई से पुरुषोत्तम मास, जानिये इस पवित्र माह की महिमा

हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर तीसरे वर्ष आने वाला अधिक मास (मलमास) 2026 में 17 मई से 15 जून तक भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र महीना है, जिसे 'पुरुषोत्तम मास' भी कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, विष्णु जी ने इसे अपना नाम दिया, जिससे यह समय पूजा, दान और सत्कर्म के लिए अत्यंत शुभ और पाप-निवारक बन गया है, जो सामान्य माह से 10 गुना अधिक फल देता है।


पुराणों में महत्व:


श्री विष्णु पुराण, देवी भागवत पुराण के अनुसार इस महीने में दान-पुण्य से जन्मों के पाप कट जाते हैं और अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है।खगोलीय आधार: यह सूर्य वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच के 11 दिनों के अंतर को संतुलित करने के लिए आता है।


भगवान विष्णु का वरदान:


पौराणिक कथाओं के अनुसार, अधिक मास का कोई स्वामी न होने के कारण इसे 'मलमास' (अपवित्र) माना जाता था। तब भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया।


भगवान विष्णु की पूजा:


इस माह में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से अनजाने में हुए पाप नष्ट होते हैं।दान-पुण्य: शास्त्रों में इस माह में दीपदान, अन्नदान, और वस्त्र दान को बहुत ही फलदायी बताया गया है।भागवत कथा और तीर्थ स्नान: तीर्थ स्थलों पर स्नान और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण विशेष महत्ता रखता है।


पुरुषोत्तम मास महिमा:


इस महीने में पुरुषोत्तम मास महिमा ग्रंथ का वाचन और श्रवण करना आध्यात्मिक उन्नति के लिए शुभ माना जाता है।
सात्विक जीवन: इस पूरे मास सात्विक भोजन, संयम और भगवान के नाम स्मरण का महत्व है अधिक मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का बहुत ही अधिक महत्व है। 


:- आचार्य राघव द्विवेदी, श्री अयोध्या जी

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17 मई से पुरुषोत्तम मास, जानिये इस पवित्र माह की महिमा

हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर तीसरे वर्ष आने वाला अधिक मास (मलमास) 2026 में 17 मई से 15 जून तक भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र महीना है, जिसे 'पुरुषोत्तम मास' भी कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, विष्णु जी ने इसे अपना नाम दिया, जिससे यह समय पूजा, दान और सत्कर्म के लिए अत्यंत शुभ और पाप-निवारक बन गया है, जो सामान्य माह से 10 गुना अधिक फल देता है।


पुराणों में महत्व:


श्री विष्णु पुराण, देवी भागवत पुराण के अनुसार इस महीने में दान-पुण्य से जन्मों के पाप कट जाते हैं और अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है।खगोलीय आधार: यह सूर्य वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच के 11 दिनों के अंतर को संतुलित करने के लिए आता है।


भगवान विष्णु का वरदान:


पौराणिक कथाओं के अनुसार, अधिक मास का कोई स्वामी न होने के कारण इसे 'मलमास' (अपवित्र) माना जाता था। तब भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम 'पुरुषोत्तम' दिया।


भगवान विष्णु की पूजा:


इस माह में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से अनजाने में हुए पाप नष्ट होते हैं।दान-पुण्य: शास्त्रों में इस माह में दीपदान, अन्नदान, और वस्त्र दान को बहुत ही फलदायी बताया गया है।भागवत कथा और तीर्थ स्नान: तीर्थ स्थलों पर स्नान और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण विशेष महत्ता रखता है।


पुरुषोत्तम मास महिमा:


इस महीने में पुरुषोत्तम मास महिमा ग्रंथ का वाचन और श्रवण करना आध्यात्मिक उन्नति के लिए शुभ माना जाता है।
सात्विक जीवन: इस पूरे मास सात्विक भोजन, संयम और भगवान के नाम स्मरण का महत्व है अधिक मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का बहुत ही अधिक महत्व है। 


:- आचार्य राघव द्विवेदी, श्री अयोध्या जी