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दक्षिण-पूर्व एशिया के देश कंबोडिया में स्थित अंकोरवाट दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मंदिर परिसर माना जाता है। यह मंदिर केवल कंबोडिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सांस्कृतिक और वास्तुकला विरासत का अनमोल प्रतीक है। अपनी विशालता, रहस्यमयी संरचना और अद्भुत नक्काशी के कारण यह मंदिर विश्वभर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
12वीं शताब्दी में हुआ निर्माण
अंकोरवाट का निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था। शुरू में यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित हिंदू मंदिर था, लेकिन समय के साथ यह बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र भी बन गया। मंदिर की वास्तुकला खमेर साम्राज्य की कला और शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। अंकोरवाट (Angkor Wat) का शाब्दिक अर्थ 'नगर का मंदिर' है।
दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर परिसर
सिएम रीप नाम के शहर में करीब 500 एकड़ में फैला यह मंदिर परिसर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के चारों ओर विशाल खाई बनी हुई है, जो इसे और भी रहस्यमयी स्वरूप प्रदान करती है। मुख्य मंदिर की ऊंची मीनारें मेरु पर्वत का प्रतीक मानी जाती हैं, जिसे हिंदू धर्म में देवताओं का निवास स्थान कहा गया है।
पत्थरों पर उकेरी गई अद्भुत कला
अंकोरवाट की दीवारों और स्तंभों पर रामायण और महाभारत से जुड़े दृश्य बेहद खूबसूरती से उकेरे गए हैं। पत्थरों पर बनी नक्काशी इतनी जीवंत दिखाई देती है कि देखने वाला आश्चर्यचकित रह जाता है। मंदिर की कला खमेर सभ्यता की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
सूर्योदय का अद्भुत दृश्य
अंकोरवाट में सूर्योदय का दृश्य दुनिया के सबसे सुंदर दृश्यों में गिना जाता है। सुबह की पहली किरण जब मंदिर की मीनारों पर पड़ती है, तब पूरा परिसर सुनहरे रंग में चमक उठता है। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं।
यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल
साल 1992 में अंकोरवाट को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। यह कंबोडिया की राष्ट्रीय पहचान भी बन चुका है और देश के राष्ट्रीय ध्वज पर भी इस मंदिर की आकृति अंकित है।
भारतीय संस्कृति की झलक
अंकोरवाट की संरचना और धार्मिक मान्यताओं में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। मंदिर की वास्तुकला, देवी-देवताओं की मूर्तियां और धार्मिक कथाएं भारत और कंबोडिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती हैं।
इस मंदिर की भव्यता और रहस्य आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। यह मंदिर मानव सभ्यता की अद्भुत वास्तुकला और आध्यात्मिक विरासत का अनमोल उदाहरण भी माना जाता है।

