Sanskar

क्या है ज्वाला देवी की महिमा ?

भारत की पवित्र भूमि पर कई ऐसे रहस्य छुपे हैं, जो आज भी विज्ञान को चुनौती देते हैं ।  एक ऐसा मंदिर, जहां बिना तेल और बाती के सदियों से जल रही हैं दिव्य ज्वालाएं । हम बात कर रहे हैं ज्वाला देवी मंदिर की । माता के चैत्र नवरात्र सन्निकट हैं और इसी अवसर जानते हैं कि आखिर क्या है इन ज्वालाओं का रहस्य और क्यों मुगल सम्राट अकबर भी इसे बुझा नहीं पाया?

 

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ज्वाला देवी मंदिर, मां दुर्गा के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। लेकिन यहां रहस्यमय रूप से धरती के गर्भ से निकलती हुई ज्वालाएं बिना ईंधन यानी तेल और घी के बिना स्वयं प्रज्जवलित होती रहती हैं । यही कारण है कि यह मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। कहा जाता है कि यह ज्वालाएं मां शक्ति का जीवंत स्वरूप हैं, जो कभी बुझती नहीं।

 

इतिहास इस बात का भी गवाह है कि मुगल सम्राट अकबर ने एक बार इन ज्वालाओं को जादू या पाखंड समझकर बुझाने की कई कोशिशें की थीं। उसेन ज्वालाओं पर पानी डलवाया । यहां तक कि नहर का पानी भी इनकी ओर मोड़ दिया लेकिन हर बार कोई नतीजा नहीं निकला । ज्वालाएं नहीं बुझीं और पहले की तरह ही जलती रहीं। यह अद्भुत दृश्य देखकर अकबर भी हैरान रह गया और अंत में मां ज्वाला के आगे सिर झुकाने को विवश हो गया । विफल होने पर उसने अपनी भूल स्वीकार की और माता को सवा मन सोने का छत्र चढ़ाया। कहा जाता है कि माता ने उसे स्वीकार नहीं किया और वह किसी अज्ञात धातु में बदल गया। इसी तरह अंग्रेजी शासन में भी ऐसी ही कोशिशें नाकाम रहीं ।

 

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है जब लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं । कई श्रद्धालु इस पवित्र ज्योति के अंश को अपने साथ लेकर जाते हैं।  वे इस ज्योति को दूसरे दीये में जलाकर अपने घरों में ले जाते हैं और उसी ज्योति से नवरात्रि पर अखंड दीप जलाते हैं । अगर यहां आना संभव न हो, तो लोग अपने आस-पास के सिद्धपीठ या शक्तिपीठ से ज्योति लेकर अपने घरों में नवरात्रि पर अखंड ज्योति स्थापित करते हैं । यह परंपरा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि मां की शक्ति से जुड़े रहने का एक पवित्र माध्यम भी है। आज भी ज्वाला देवी मंदिर आस्था, विश्वास और चमत्कार का प्रतीक बना हुआ है । यहां हर साल लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं । यह मंदिर हमें यह एहसास कराता है कि कुछ शक्तियां ऐसी होती हैं, जो विज्ञान की सीमाओं से परे होती हैं

 

: - वर्तिका श्रीवास्तव

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भारत की पवित्र भूमि पर कई ऐसे रहस्य छुपे हैं, जो आज भी विज्ञान को चुनौती देते हैं ।  एक ऐसा मंदिर, जहां बिना तेल और बाती के सदियों से जल रही हैं दिव्य ज्वालाएं । हम बात कर रहे हैं ज्वाला देवी मंदिर की । माता के चैत्र नवरात्र सन्निकट हैं और इसी अवसर जानते हैं कि आखिर क्या है इन ज्वालाओं का रहस्य और क्यों मुगल सम्राट अकबर भी इसे बुझा नहीं पाया?

 

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ज्वाला देवी मंदिर, मां दुर्गा के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। लेकिन यहां रहस्यमय रूप से धरती के गर्भ से निकलती हुई ज्वालाएं बिना ईंधन यानी तेल और घी के बिना स्वयं प्रज्जवलित होती रहती हैं । यही कारण है कि यह मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। कहा जाता है कि यह ज्वालाएं मां शक्ति का जीवंत स्वरूप हैं, जो कभी बुझती नहीं।

 

इतिहास इस बात का भी गवाह है कि मुगल सम्राट अकबर ने एक बार इन ज्वालाओं को जादू या पाखंड समझकर बुझाने की कई कोशिशें की थीं। उसेन ज्वालाओं पर पानी डलवाया । यहां तक कि नहर का पानी भी इनकी ओर मोड़ दिया लेकिन हर बार कोई नतीजा नहीं निकला । ज्वालाएं नहीं बुझीं और पहले की तरह ही जलती रहीं। यह अद्भुत दृश्य देखकर अकबर भी हैरान रह गया और अंत में मां ज्वाला के आगे सिर झुकाने को विवश हो गया । विफल होने पर उसने अपनी भूल स्वीकार की और माता को सवा मन सोने का छत्र चढ़ाया। कहा जाता है कि माता ने उसे स्वीकार नहीं किया और वह किसी अज्ञात धातु में बदल गया। इसी तरह अंग्रेजी शासन में भी ऐसी ही कोशिशें नाकाम रहीं ।

 

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है जब लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं । कई श्रद्धालु इस पवित्र ज्योति के अंश को अपने साथ लेकर जाते हैं।  वे इस ज्योति को दूसरे दीये में जलाकर अपने घरों में ले जाते हैं और उसी ज्योति से नवरात्रि पर अखंड दीप जलाते हैं । अगर यहां आना संभव न हो, तो लोग अपने आस-पास के सिद्धपीठ या शक्तिपीठ से ज्योति लेकर अपने घरों में नवरात्रि पर अखंड ज्योति स्थापित करते हैं । यह परंपरा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि मां की शक्ति से जुड़े रहने का एक पवित्र माध्यम भी है। आज भी ज्वाला देवी मंदिर आस्था, विश्वास और चमत्कार का प्रतीक बना हुआ है । यहां हर साल लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं । यह मंदिर हमें यह एहसास कराता है कि कुछ शक्तियां ऐसी होती हैं, जो विज्ञान की सीमाओं से परे होती हैं

 

: - वर्तिका श्रीवास्तव