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चैत्र नवरात्रि का आज अंतिम दिन है और पूरे देश में माता रानी की भक्ति का माहौल अपने चरम पर है। शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ ही राम नवमी का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, जहां लोग विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना कर रहे हैं। आज के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।
नवरात्रि के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इसी दिन भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में राम नवमी भी मनाई जाती है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
अनोखा शक्तिपीठ
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर एक ऐसे शक्तिपीठ की बात करना भी खास है, जो अपनी अनोखी मान्यता के लिए जाना जाता है। संगम नगरी प्रयागराज में स्थित अलोप शंकरी देवी मंदिर अन्य शक्तिपीठों से बिल्कुल अलग है। यहां न तो मां की कोई प्रतिमा है और न ही किसी अंग का स्पष्ट चिन्ह। मान्यता है कि माता सती के दाहिने हाथ का पंजा यहां गिरकर अदृश्य (अलोप) हो गया था। इसी कारण इस स्थान को ‘अलोप शंकरी’ नाम दिया गया और यहां मां के प्रतीक रूप में एक पालने (झूले) की पूजा की जाती है।
पालने की पूजा
इस मंदिर में श्रद्धालु कुंड से जल लेकर पालने पर अर्पित करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि यहां हाथ या पैर में रक्षा सूत्र बांधकर मां से जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वह अवश्य पूर्ण होती है।

