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11 जून को परमा एकादशी : जानिए दान-व्रत, शुभ मंत्र और कथा

इस बार 11 जून (गुरुवार) को परमा एकादशी है जो कि नाम से ही स्पष्ट है कि परम फलदायी है । हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं। हर महीने दो एकादशी पड़ती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। हालांकि, जिस वर्ष अधिकमास यानी मलमास लगता है, उस वर्ष एकादशियों की संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।

 

इन सभी एकादशियों का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व बताया गया है, लेकिन परमा एकादशी सबसे विशेष मानी जाती है। यह एक दुर्लभ एकादशी है, जो केवल अधिक मास में आती है और लगभग तीन साल में एक बार पड़ती है। मान्यता है कि परमा परमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य, पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इसी कारण इसे सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी एकादशियों में से एक माना जाता है। आइए जानते हैं कि परमा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और किन मंत्रों का जाप करना आपके लिए शुभ होगा।

 

कब है परमा एकादशी ?

 

पंचांग के अनुसार इस साल परमा एकादशी 11 जून को मनाई जाएगी। एकादशी के दिन चावल, गेहूं, दालें और किसी भी तरह का अन्न खाना पूरी तरह वर्जित है। अगर आप चाहें तो फलाहार या सिर्फ जल का सेवन करते हुए व्रत रख सकते हैं। अब जानते हैं कि परमा एकादशी के दिन आपको भगवान विष्णु की आराधना के लिए किन मंत्रों का जाप करना चाहिए।

 

भगवान विष्णु के मंत्र

 

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ नमो नारायणाय

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।।

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये।।

 

इन वस्तुओं का दान करें

 

एकादशी पर नाम जप, अनुष्ठान एवं व्रत के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है । इस एकादशी पर आप जरूरतमंदों को आटा, चावल, दाल, जल और रसीले फलों का दान कर सकते हैं। मान्यताएं हैं कि परमा एकादशी पर निस्वार्थ भाव से किया गया दान और सेवा आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता हैं। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अगर व्रत रखते हैं तो एकादशी पर दान जरूर करें ताकि आपको व्रत रखने का पूरा लाभ प्राप्त हो सके।

 

परमा एकादशी कथा

 

प्राचीन समय में काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहता था। दोनों धर्मपरायण थे, लेकिन पूर्व कर्मों के कारण अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक दिन ब्राह्मण ने धन कमाने के लिए परदेस जाने की इच्छा जताई, लेकिन उसकी पत्नी ने उसे समझाया कि जो भाग्य में होगा, वह यहीं प्राप्त होगा। पत्नी की बात मानकर ब्राह्मण वहीं रुक गया।

 

कुछ समय बाद उनके घर कौण्डिन्य ऋषि पधारे। दंपति ने श्रद्धापूर्वक उनका सत्कार किया और अपनी दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा। तब ऋषि ने उन्हें अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत से पाप, दुख और दरिद्रता का नाश होता है तथा धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

 

ऋषि के बताए अनुसार सुमेधा और उनकी पत्नी ने श्रद्धा और नियमपूर्वक परमा एकादशी का व्रत किया। भगवान की कृपा से उनकी विपन्नता दूर हो गई और उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर गया। इसलिए परमा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना जाता है। इसी विश्वास के साथ भक्त इस दिन उपवास, पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करके भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

 

:- देविशा केशरी

 

 

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11 जून को परमा एकादशी : जानिए दान-व्रत, शुभ मंत्र और कथा

इस बार 11 जून (गुरुवार) को परमा एकादशी है जो कि नाम से ही स्पष्ट है कि परम फलदायी है । हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं। हर महीने दो एकादशी पड़ती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। हालांकि, जिस वर्ष अधिकमास यानी मलमास लगता है, उस वर्ष एकादशियों की संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।

 

इन सभी एकादशियों का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व बताया गया है, लेकिन परमा एकादशी सबसे विशेष मानी जाती है। यह एक दुर्लभ एकादशी है, जो केवल अधिक मास में आती है और लगभग तीन साल में एक बार पड़ती है। मान्यता है कि परमा परमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य, पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इसी कारण इसे सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी एकादशियों में से एक माना जाता है। आइए जानते हैं कि परमा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और किन मंत्रों का जाप करना आपके लिए शुभ होगा।

 

कब है परमा एकादशी ?

 

पंचांग के अनुसार इस साल परमा एकादशी 11 जून को मनाई जाएगी। एकादशी के दिन चावल, गेहूं, दालें और किसी भी तरह का अन्न खाना पूरी तरह वर्जित है। अगर आप चाहें तो फलाहार या सिर्फ जल का सेवन करते हुए व्रत रख सकते हैं। अब जानते हैं कि परमा एकादशी के दिन आपको भगवान विष्णु की आराधना के लिए किन मंत्रों का जाप करना चाहिए।

 

भगवान विष्णु के मंत्र

 

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ नमो नारायणाय

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।।

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये।।

 

इन वस्तुओं का दान करें

 

एकादशी पर नाम जप, अनुष्ठान एवं व्रत के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है । इस एकादशी पर आप जरूरतमंदों को आटा, चावल, दाल, जल और रसीले फलों का दान कर सकते हैं। मान्यताएं हैं कि परमा एकादशी पर निस्वार्थ भाव से किया गया दान और सेवा आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता हैं। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अगर व्रत रखते हैं तो एकादशी पर दान जरूर करें ताकि आपको व्रत रखने का पूरा लाभ प्राप्त हो सके।

 

परमा एकादशी कथा

 

प्राचीन समय में काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहता था। दोनों धर्मपरायण थे, लेकिन पूर्व कर्मों के कारण अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक दिन ब्राह्मण ने धन कमाने के लिए परदेस जाने की इच्छा जताई, लेकिन उसकी पत्नी ने उसे समझाया कि जो भाग्य में होगा, वह यहीं प्राप्त होगा। पत्नी की बात मानकर ब्राह्मण वहीं रुक गया।

 

कुछ समय बाद उनके घर कौण्डिन्य ऋषि पधारे। दंपति ने श्रद्धापूर्वक उनका सत्कार किया और अपनी दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा। तब ऋषि ने उन्हें अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत से पाप, दुख और दरिद्रता का नाश होता है तथा धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

 

ऋषि के बताए अनुसार सुमेधा और उनकी पत्नी ने श्रद्धा और नियमपूर्वक परमा एकादशी का व्रत किया। भगवान की कृपा से उनकी विपन्नता दूर हो गई और उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर गया। इसलिए परमा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना जाता है। इसी विश्वास के साथ भक्त इस दिन उपवास, पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करके भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

 

:- देविशा केशरी