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कौन हैं चंद्र देव, क्यों घटता-बढ़ता है चंद्रमा ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्र देव महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र हैं। उन्हें मन, शांति, प्रेम और भावनाओं का देवता माना जाता है। हिंदू पंचांग की तिथियाँ भी चंद्रमा की गति के आधार पर तय होती हैं।


लेकिन एक समय ऐसा आया, जब राजा दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों में केवल रोहिणी को अधिक प्रेम देने के कारण अपने दामाद चंद्र देव को श्राप दिया कि उनका तेज और वैभव दिन-प्रतिदिन क्षीण होता जाएगा। अपना अस्तित्व बचाने के लिए चंद्र देव ने महादेव की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने वरदान दिया कि वे कभी पूर्ण रूप से लुप्त नहीं होंगे। वे हर महीने 15 दिनों तक धीरे-धीरे कांतिहीन होंगे, जिसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। अगले 15 दिनों तक फिर से पूर्णता की ओर बढ़ेंगे, जिसे शुक्ल पक्ष कहते हैं। तभी से हर महीने चंद्रमा का आकार घटता और बढ़ता दिखाई देता है। महादेव ने उन्हें अपने मस्तक पर भी धारण किया ।


चंद्र देव कर्क राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप रजत के समान उज्ज्वल है । वे श्वेत वस्त्र धारण करते हैं और उनका वाहन मृग अर्थात हिरन है । चंद्र देव का रत्न मोती है, जो मन की शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है। चंद्रमा को सोम भी कहा जाता है और सोमवार के दिन भगवान शिव को सफेद फूल, दूध, साबुत चावल और खीर अर्पित करने का विधान है । इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ चंद्र दोष से छुटकारा मिलता है ।

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पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्र देव महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र हैं। उन्हें मन, शांति, प्रेम और भावनाओं का देवता माना जाता है। हिंदू पंचांग की तिथियाँ भी चंद्रमा की गति के आधार पर तय होती हैं।


लेकिन एक समय ऐसा आया, जब राजा दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों में केवल रोहिणी को अधिक प्रेम देने के कारण अपने दामाद चंद्र देव को श्राप दिया कि उनका तेज और वैभव दिन-प्रतिदिन क्षीण होता जाएगा। अपना अस्तित्व बचाने के लिए चंद्र देव ने महादेव की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने वरदान दिया कि वे कभी पूर्ण रूप से लुप्त नहीं होंगे। वे हर महीने 15 दिनों तक धीरे-धीरे कांतिहीन होंगे, जिसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। अगले 15 दिनों तक फिर से पूर्णता की ओर बढ़ेंगे, जिसे शुक्ल पक्ष कहते हैं। तभी से हर महीने चंद्रमा का आकार घटता और बढ़ता दिखाई देता है। महादेव ने उन्हें अपने मस्तक पर भी धारण किया ।


चंद्र देव कर्क राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप रजत के समान उज्ज्वल है । वे श्वेत वस्त्र धारण करते हैं और उनका वाहन मृग अर्थात हिरन है । चंद्र देव का रत्न मोती है, जो मन की शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है। चंद्रमा को सोम भी कहा जाता है और सोमवार के दिन भगवान शिव को सफेद फूल, दूध, साबुत चावल और खीर अर्पित करने का विधान है । इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ चंद्र दोष से छुटकारा मिलता है ।