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घर का मुख्य द्वार सिर्फ बाहर से अंदर आने का रास्ता नहीं बल्कि यही वह स्थान है, जहां से घर में शुभता और सकारात्मक भाव का स्वागत किया जाता है। इसी वजह से भारतीय परंपरा में मुख्य द्वार पर गणपति जी की प्रतिमा स्थापित करने को विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि वह हर प्रकार के शुभारंभ का प्रतीक हैं। घर के प्रवेश द्वार पर उनका चित्र या प्रतिमा स्थापित करना शुभता का प्रतीक है।
लेकिन गणपति का चित्र या प्रतिमा मुख्य द्वार पर कहीं भी लगा देना सही नहीं है। उसका स्थान, दिशा, स्वरूप और उसे रखने का तरीका इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। तो आखिर मुख्य द्वार पर गणपति जी की प्रतिमा कहां और कैसे लगानी चाहिए? आइए जानते हैं।
गणेश प्रतिमा का स्थान
परंपराओं के अनुसार, सबसे पहले प्रतिमा के स्थान का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए ऐसी जगह चुनें जहां घर में प्रवेश करते समय उनका दर्शन आसानी से हो सके। प्रतिमा को बहुत नीचे या बहुत ऊपर लगाने या रखने की बजाय, आंखों के समानांतर या उससे थोड़ा ऊपर रखना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
गणेश प्रतिमा की दिशा
वास्तुशास्त्र और धार्मिक मान्यताओं में मुख्य द्वार की दिशा के अनुसार गणपति जी की प्रतिमा को लेकर अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं। इसलिए किसी एक नियम को हर घर पर लागू करने के बजाय, अपने घर की दिशा और स्थानीय परंपरा को ध्यान में रखना बेहतर माना जाता है। वैसे ईशान अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा ज्यादा उपयोगी है।
गणेश प्रतिमा का स्वरूप

