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सनातन धर्म में पूजा-पाठ और अभिषेक के दौरान पंचामृत का विशेष महत्व बताया गया है। चाहे भगवान शिव का रुद्राभिषेक (#rudrabhishek) हो, श्रीहरि विष्णु की पूजा, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव या किसी भी देवी-देवता का अभिषेक । पंचामृत के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पंचामृत भगवान को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान को पंचामृत ही क्यों चढ़ाया जाता है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है? आइए जानते हैं।
भगवान को क्यों चढ़ाया जाता है पंचामृत ?
'पंचामृत' (#panchamrit) का अर्थ है पाँच अमृत तुल्य पदार्थों का मिश्रण। दूध, दही, घी, शहद और मिश्री से तैयार यह पवित्र मिश्रण शुद्धता, समृद्धि और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान को वही अर्पित किया जाता है जो सबसे पवित्र, पौष्टिक और शुभ माना जाए। यही कारण है कि अभिषेक और भोग में पंचामृत का विशेष स्थान है।
धार्मिक मान्यता है कि पंचामृत से भगवान शंकर (#mahadev)

