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क्यों रखा जाता है हरतालिका तीज का व्रत ?

हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति की इच्छा से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं।

 

हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस पर्व का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव को पति के रूप में पाने के उनके संकल्प से माना जाता है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज का महत्व, इसकी सही तारीख और पूजा की विधि।

 

हरतालिका तीज का व्रत क्यों रखा जाता है?

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या और अटूट संकल्प के सम्मान में हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं माता पार्वती से अपने लिए अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना करती हैं।

 

हरतालिका तीज का क्या महत्व है?

 

हरतालिका तीज को सुहाग, दांपत्य सुख और शिव-पार्वती के प्रेम से जुड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं श्रद्धा के साथ व्रत रखती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती का पूजन करती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं, हालांकि व्रत की कठोरता व्यक्ति की क्षमता और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से व्रत और पूजा करने पर शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस बार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर (सोमवार) को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं सुबह से व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। शाम के समय भी विशेष पूजा और आरती करने की परंपरा है। विशेष बात है कि इसी दिन गणेश चतुर्थी भी है ।

 

हरतालिका तीज की पूजा कैसे करें?

 

हरतालिका तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। कई स्थानों पर इस दिन मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर पूजा करने की भी परंपरा है।

 

अब भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल, चंदन और फल अर्पित करें। माता पार्वती को फूल, फल और सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिव-पार्वती का ध्यान करें। पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।

 

:- लता रानी

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क्यों रखा जाता है हरतालिका तीज का व्रत ?

हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति की इच्छा से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं।

 

हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस पर्व का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव को पति के रूप में पाने के उनके संकल्प से माना जाता है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज का महत्व, इसकी सही तारीख और पूजा की विधि।

 

हरतालिका तीज का व्रत क्यों रखा जाता है?

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या और अटूट संकल्प के सम्मान में हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं माता पार्वती से अपने लिए अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना करती हैं।

 

हरतालिका तीज का क्या महत्व है?

 

हरतालिका तीज को सुहाग, दांपत्य सुख और शिव-पार्वती के प्रेम से जुड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं श्रद्धा के साथ व्रत रखती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती का पूजन करती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं, हालांकि व्रत की कठोरता व्यक्ति की क्षमता और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से व्रत और पूजा करने पर शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस बार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर (सोमवार) को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं सुबह से व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। शाम के समय भी विशेष पूजा और आरती करने की परंपरा है। विशेष बात है कि इसी दिन गणेश चतुर्थी भी है ।

 

हरतालिका तीज की पूजा कैसे करें?

 

हरतालिका तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। कई स्थानों पर इस दिन मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर पूजा करने की भी परंपरा है।

 

अब भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल, चंदन और फल अर्पित करें। माता पार्वती को फूल, फल और सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिव-पार्वती का ध्यान करें। पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद शिव-पार्वती की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।

 

:- लता रानी