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गणेश जी को दूर्वा क्यों है अत्यंत प्रिय?



भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए भक्त उन्हें मोदक, फूल, तुलसी, सिंदूर और कई वस्तुएं अर्पित करते हैं। लेकिन गणपति की पूजा में एक ऐसी वनस्पति भी चढ़ाई जाती है, जो देखने में बहुत साधारण है... और वो है दूर्वा.....जो गणेश जी को अत्यंत प्रिय है ।

गणेश जी को दूर्वा क्यों है अत्यंत प्रिय?

आखिर गणेश जी को दूर्वा इतनी प्रिय क्यों है? इसके पीछे गणेश पुराण में कई रोचक कथाएं बताई गई हैं। एक कथा के अनुसार दूर्वा चढ़ाने के बाद गणेश जी की भूख तक शांत हो गई । तो दूसरी कथा बताती है कि अनजाने में चढ़ाई गई दूर्वा से भी गणपति प्रसन्न हो गए।आखिर क्या हैं ये प्रसंग, आइये जानते हैं।

दूर्वा से जुड़ी गणेश पुराण की कथाएं

एक बार अनलासुर नाम के असुर ने देवताओं और ऋषियों को परेशान कर दिया था। उसका शरीर आग की तरह तप रहा था, जिसके प्रकोप से सभी परेशान थे। तब गणेश जी ने उसका सामना किया और उसे अपने भीतर धारण कर लिया। लेकिन इससे गणेश जी के शरीर में भी तेज गर्मी असर दिखाने लगी। देवताओं और ऋषियों ने गणपति को राहत पहुंचाने के कई उपाय किए। जब सभी प्रयास विफल रहे तब ऋषियों ने गणपति जी को दूर्वांकुर अर्पित किया। मान्यता है कि दूर्वा चढ़ाते ही गणेश जी का ताप शांत होने लगा। तभी से गणपति की पूजा में दूर्वा को विशेष महत्व मिला ।


गणेश जी कहते हैं कि “ मेरे भक्तों द्वारा सुबह के समय (ऊषाकाल) भक्तिपूर्वक अर्पित की गई एक या इक्कीस दूर्वा (दूब घास) अत्यंत महान और श्रेष्ठ फल प्रदान करती है।“ गणेश जी को 21 दूर्वांकुर चढ़ाने की परंपरा में भक्त इसकी छोटी-छोटी गांठें बनाकर अर्पित करते हैं। दूर्वा गणेश जी को प्रिय है और इसे श्रद्धापूर्वक चढ़ाने पर वो प्रसन्न होते हैं। लेकिन दूर्वा से जुड़ी कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती...

अनजाने में चढ़ी दूर्वा से खुश हुए गणेश

गणेश पुराण में दूर्वा से जुड़ी एक और कथा भी मिलती है। कहा जाता है कि एक बार एक चांडाली और एक गधा गणेश मंदिर पहुंचे। वहां उनके माध्यम से अनजाने में दूर्वा गणेश जी पर गिर गई। न कोई बड़ा अनुष्ठान हुआ...
न कोई विशेष पूजा। लेकिन गणेश जी उस छोटी-सी भेंट से ही प्रसन्न हो गए और दोनों को अपने लोक में स्थान दिया।
भगवान के लिए भेंट कितनी बड़ी है, यह जरूरी नहीं। जरूरी है कि उसके पीछे भाव कितना सच्चा है। शायद यही वजह है कि गणेश जी की पूजा में दूर्वा का इतना महत्व है। दूर्वा हमें याद दिलाती है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए बहुत कुछ करना जरूरी नहीं है। जरूरी है... सच्ची श्रद्धा और साफ मन।

 

:-  लता रानी

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गणेश जी को दूर्वा क्यों है अत्यंत प्रिय?



भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए भक्त उन्हें मोदक, फूल, तुलसी, सिंदूर और कई वस्तुएं अर्पित करते हैं। लेकिन गणपति की पूजा में एक ऐसी वनस्पति भी चढ़ाई जाती है, जो देखने में बहुत साधारण है... और वो है दूर्वा.....जो गणेश जी को अत्यंत प्रिय है ।

गणेश जी को दूर्वा क्यों है अत्यंत प्रिय?

आखिर गणेश जी को दूर्वा इतनी प्रिय क्यों है? इसके पीछे गणेश पुराण में कई रोचक कथाएं बताई गई हैं। एक कथा के अनुसार दूर्वा चढ़ाने के बाद गणेश जी की भूख तक शांत हो गई । तो दूसरी कथा बताती है कि अनजाने में चढ़ाई गई दूर्वा से भी गणपति प्रसन्न हो गए।आखिर क्या हैं ये प्रसंग, आइये जानते हैं।

दूर्वा से जुड़ी गणेश पुराण की कथाएं

एक बार अनलासुर नाम के असुर ने देवताओं और ऋषियों को परेशान कर दिया था। उसका शरीर आग की तरह तप रहा था, जिसके प्रकोप से सभी परेशान थे। तब गणेश जी ने उसका सामना किया और उसे अपने भीतर धारण कर लिया। लेकिन इससे गणेश जी के शरीर में भी तेज गर्मी असर दिखाने लगी। देवताओं और ऋषियों ने गणपति को राहत पहुंचाने के कई उपाय किए। जब सभी प्रयास विफल रहे तब ऋषियों ने गणपति जी को दूर्वांकुर अर्पित किया। मान्यता है कि दूर्वा चढ़ाते ही गणेश जी का ताप शांत होने लगा। तभी से गणपति की पूजा में दूर्वा को विशेष महत्व मिला ।


गणेश जी कहते हैं कि “ मेरे भक्तों द्वारा सुबह के समय (ऊषाकाल) भक्तिपूर्वक अर्पित की गई एक या इक्कीस दूर्वा (दूब घास) अत्यंत महान और श्रेष्ठ फल प्रदान करती है।“ गणेश जी को 21 दूर्वांकुर चढ़ाने की परंपरा में भक्त इसकी छोटी-छोटी गांठें बनाकर अर्पित करते हैं। दूर्वा गणेश जी को प्रिय है और इसे श्रद्धापूर्वक चढ़ाने पर वो प्रसन्न होते हैं। लेकिन दूर्वा से जुड़ी कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती...

अनजाने में चढ़ी दूर्वा से खुश हुए गणेश

गणेश पुराण में दूर्वा से जुड़ी एक और कथा भी मिलती है। कहा जाता है कि एक बार एक चांडाली और एक गधा गणेश मंदिर पहुंचे। वहां उनके माध्यम से अनजाने में दूर्वा गणेश जी पर गिर गई। न कोई बड़ा अनुष्ठान हुआ...
न कोई विशेष पूजा। लेकिन गणेश जी उस छोटी-सी भेंट से ही प्रसन्न हो गए और दोनों को अपने लोक में स्थान दिया।
भगवान के लिए भेंट कितनी बड़ी है, यह जरूरी नहीं। जरूरी है कि उसके पीछे भाव कितना सच्चा है। शायद यही वजह है कि गणेश जी की पूजा में दूर्वा का इतना महत्व है। दूर्वा हमें याद दिलाती है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए बहुत कुछ करना जरूरी नहीं है। जरूरी है... सच्ची श्रद्धा और साफ मन।

 

:-  लता रानी