Sanskar

गणपति के आठ अवतार कौन-कौन से है? 

 

भगवान गणेश...  जिन्हें सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं... गणपति के ऐसे आठ प्रमुख अवतार हैं, जिनका संबंध मनुष्य के भीतर छिपे अलग-अलग विकारों से बताया गया है?

 

जानिये, क्या हैं गणपति के आठ दिव्य अवतार

 

गणेश जी के ये आठ अवतार... सिर्फ अलग-अलग रूपों की कथा नहीं, बल्कि जीवन में मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय का आध्यात्मिक संदेश भी देते हैं।

भगवान श्रीगणेश नौ निधियों के साथ अष्ट सिद्धि के दाता है। उनके हर स्वरूप की महिमा अपरम्पार है। आइए जानते हैं गणपति के आठ दिव्य अवतारों के बारे में।

 

वक्रतुंड अवतार

 

इस स्वरूप में गणपति ने मत्सरासुर का संहार किया।
मत्सरासुर... यानी ईर्ष्या और जलन का प्रतीक।

 

एकदंत अवतार

 

भगवान गणेश ने मदासुर को पराजित किया।
मद यानी अहंकार और घमंड।

 

महोदर अवतार

 

महोदर अवतार ने मोहासुर का अंत किया।
मोह... यानी ऐसी आसक्ति, जो मनुष्य के विवेक को ढक देती है।

 

गजानन अवतार

 

गजानन अवतार के रूप में भगवान गणेश ने लालच के प्रतीक लोभासुर का संहार किया।

 

लम्बोदर अवतार

 

लम्बोदर अवतार में गणपति ने एक क्रोध के प्रतीक क्रोधासुर को पराजित किया।

विकट अवतार

भगवान गणेश ने इस स्वरूप को वासना के प्रतीक कामासुर के वध के लिए धारण किया ।

 

विघ्नराज अवतार

 

इस अवतार में भगवान गणेश ने ममासुर का संहार किया जो बाधाओं को हराने का प्रतीक है

 

धूम्रवर्ण अवतार

 

इस स्वरूप में भगवान गणेश ने अहम और बुराइयों के प्रतीक अहंकारासुर का दमन किया।

गणपति के ये आठ अवतार...मानो मनुष्य के भीतर मौजूद आठ विकारों के विरुद्ध एक आध्यात्मिक युद्ध है। क्योंकि भगवान गणेश की सच्ची आराधना सिर्फ बाहरी विघ्नों को दूर करना नहीं...बल्कि मन के भीतर छिपे विकारों पर विजय पाना भी है।

Related News

गणपति के आठ अवतार कौन-कौन से है? 

 

भगवान गणेश...  जिन्हें सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं... गणपति के ऐसे आठ प्रमुख अवतार हैं, जिनका संबंध मनुष्य के भीतर छिपे अलग-अलग विकारों से बताया गया है?

 

जानिये, क्या हैं गणपति के आठ दिव्य अवतार

 

गणेश जी के ये आठ अवतार... सिर्फ अलग-अलग रूपों की कथा नहीं, बल्कि जीवन में मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय का आध्यात्मिक संदेश भी देते हैं।

भगवान श्रीगणेश नौ निधियों के साथ अष्ट सिद्धि के दाता है। उनके हर स्वरूप की महिमा अपरम्पार है। आइए जानते हैं गणपति के आठ दिव्य अवतारों के बारे में।

 

वक्रतुंड अवतार

 

इस स्वरूप में गणपति ने मत्सरासुर का संहार किया।
मत्सरासुर... यानी ईर्ष्या और जलन का प्रतीक।

 

एकदंत अवतार

 

भगवान गणेश ने मदासुर को पराजित किया।
मद यानी अहंकार और घमंड।

 

महोदर अवतार

 

महोदर अवतार ने मोहासुर का अंत किया।
मोह... यानी ऐसी आसक्ति, जो मनुष्य के विवेक को ढक देती है।

 

गजानन अवतार

 

गजानन अवतार के रूप में भगवान गणेश ने लालच के प्रतीक लोभासुर का संहार किया।

 

लम्बोदर अवतार

 

लम्बोदर अवतार में गणपति ने एक क्रोध के प्रतीक क्रोधासुर को पराजित किया।

विकट अवतार

भगवान गणेश ने इस स्वरूप को वासना के प्रतीक कामासुर के वध के लिए धारण किया ।

 

विघ्नराज अवतार

 

इस अवतार में भगवान गणेश ने ममासुर का संहार किया जो बाधाओं को हराने का प्रतीक है

 

धूम्रवर्ण अवतार

 

इस स्वरूप में भगवान गणेश ने अहम और बुराइयों के प्रतीक अहंकारासुर का दमन किया।

गणपति के ये आठ अवतार...मानो मनुष्य के भीतर मौजूद आठ विकारों के विरुद्ध एक आध्यात्मिक युद्ध है। क्योंकि भगवान गणेश की सच्ची आराधना सिर्फ बाहरी विघ्नों को दूर करना नहीं...बल्कि मन के भीतर छिपे विकारों पर विजय पाना भी है।