भगवान गणेश... जिन्हें सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाल गणेश की लीलाएं भी बेहद अद्भुत और रोचक हैं? कहीं उनके पराक्रम के दर्शन होते हैं, तो कहीं उनकी बालसुलभ चंचलता दिखाई देती है... और कहीं अपनी बुद्धि से वे देवताओं तक को चकित कर देते हैं।आइए जानते हैं बाल गणेश की ऐसी ही कुछ दिव्य और रोचक लीलाओं के बारे में...
बाल गणेश की अद्भुत लीलाओं की कथा
बाल गणेश की सबसे प्रसिद्ध लीला जुड़ी है माता पार्वती और भगवान शिव से। कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण फूंकते हुए गणेश का नाम दिया । उन्होंने गणेश को आदेश दिया कि उनकी अनुमति के बिना किसी को भी द्वार के भीतर प्रवेश न करने दें। तभी भगवान शिव वहां पहुंचे। लेकिन बाल गणेश ने माता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए स्वयं भगवान शिव को भी द्वार पर रोक दिया। इसके बाद शिवगणों और बाल गणेश के बीच युद्ध हुआ। बाल अवस्था में भी उनके अद्भुत पराक्रम ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। आगे चलकर भगवान शिव ने उन्हें गजमुख प्रदान किया और वे गजानन कहलाए।
बाल रूप में दिखाया बुद्धि और पराक्रम
बाल गणेश की एक और लीला उनकी अद्भुत बुद्धि से जुड़ी है। गणेश पुराण के अनुसार जब देवताओं के बीच यह प्रश्न उठा कि प्रथम पूजा का अधिकारी कौन होगा, तो भगवान शिव ने संसार की परिक्रमा की प्रतियोगिता रखी। सभी देवता अपने-अपने वाहनों पर निकल पड़े। लेकिन गणेश जी का वाहन था मूषक। गणेश जी ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और भगवान शिव की परिक्रमा कर उनके सामने पहुंच गए। उन्होंने कहा—“समस्त संसार शिव-पार्वती जी में विद्यमान है, इसलिए उनकी परिक्रमा ही संसार की परिक्रमा है।”उनकी बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूजा का अधिकारी घोषित किया।
बाल गणेश ने कुबेर का अहंकार किया चूर
एक अन्य प्रसिद्ध प्रसंग कुबेर के अहंकार से जुड़ा है। धन के देवता कुबेर को अपनी संपत्ति पर अभिमान था। उन्होंने भगवान शिव को भव्य भोज के लिए आमंत्रित किया। शिवजी ने बाल गणेश को उनके यहां भेज दिया।गणेश जी ने भोजन करना शुरू किया तो उनकी भूख बढ़ती ही गई। देखते ही देखते कुबेर के महल का सारा भोजन समाप्त हो गया।इस लीला ने कुबेर का अहंकार चूर कर दिया और उन्हें समझ आया कि धन से बड़ा महत्व विनम्रता का है।
बाल गणेश की लीलाओं में उनकी चंचलता भी दिखाई देती है। एक प्रसंग में खेलते-खेलते उन्हें भूख लगी और वे गौतम ऋषि के आश्रम पहुंच गए। वहां उन्होंने भोजन किया और अपने मित्रों के साथ बालसुलभ शरारत करने लगे। जब माता पार्वती को इसका पता चला तो उन्होंने गणेश जी को एक कुटिया में बांध दिया। लेकिन कुछ ही देर बाद माता को हर जगह गणेश जी दिखाई देने लगे। कभी गोद में... तो कभी शिवगणों के साथ खेलते हुए। आखिरकार कुटिया में रोते हुए गणेश को देखकर माता का वात्सल्य उमड़ पड़ा और उन्होंने उन्हें मुक्त कर दिया।
बाल गणेश की लीलाएं केवल मनोरंजन की कथाएं नहीं हैं। इनमें बुद्धि है... साहस है... माता-पिता के प्रति सम्मान है और अहंकार से दूर रहने का संदेश भी है। यही वजह है कि बाल गणेश का मनमोहक स्वरूप आज भी करोड़ों भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता है।
:- लता रानी

