केतु एक रहस्यमयी छाया ग्रह हैं जिनका सिर नहीं सिर्फ धड़ है। सिर न होने के कारण केतु सांसारिक दुनिया, अहंकार, और लालच के मायाजाल में नहीं फंसते। जैसे राहु हमें दुनिया के पीछे भागना सिखाते हैं। इसके विपरीत, केतु हमें दुनिया के मोह से ऊपर उठना सिखाते है।
नवग्रहों में केतु को आध्यात्म, मोक्ष, ज्ञान, रहस्य और अचानक होने वाले बदलावों का कारक माना जाता है। कुंडली में केतु शुभ हो तो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान की प्राप्ति होती है, वहीं केतु अशुभ होने पर भ्रम, अस्थिरता और अचानक आने वाली कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
केतु किसी भी राशि के स्वामी नहीं हैं। उनका स्वरूप भूरा या धुएँ के समान धूसर रंग का है। केतु का रत्न लहसुनिया यानी Cat's Eye है, जो आध्यात्मिक शक्ति, एकाग्रता और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा का प्रतीक है। और हाँ, तमिलनाडु के कीलापेरुमपल्लम में स्थित श्री नागनाथस्वामी मंदिर, जिसे केतु स्थलम कहा जाता है, केतु का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।
धार्मिक मान्यता है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने से केतु दोष के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं तथा ज्ञान और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को केतु दोष या कालसर्प दोष हो, तो उसके द्वारा शिवलिंग पर दूध चढ़ाने पर उसका रंग कुछ समय के लिए नीला दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की कृपा और दोष से मुक्ति का संकेत मानते हैं।
केतु एक रहस्यमयी छाया ग्रह हैं जिनका सिर नहीं सिर्फ धड़ है। सिर न होने के कारण केतु सांसारिक दुनिया, अहंकार, और लालच के मायाजाल में नहीं फंसते। जैसे राहु हमें दुनिया के पीछे भागना सिखाते हैं। इसके विपरीत, केतु हमें दुनिया के मोह से ऊपर उठना सिखाते है।
नवग्रहों में केतु को आध्यात्म, मोक्ष, ज्ञान, रहस्य और अचानक होने वाले बदलावों का कारक माना जाता है। कुंडली में केतु शुभ हो तो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान की प्राप्ति होती है, वहीं केतु अशुभ होने पर भ्रम, अस्थिरता और अचानक आने वाली कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
केतु किसी भी राशि के स्वामी नहीं हैं। उनका स्वरूप भूरा या धुएँ के समान धूसर रंग का है। केतु का रत्न लहसुनिया यानी Cat's Eye है, जो आध्यात्मिक शक्ति, एकाग्रता और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा का प्रतीक है। और हाँ, तमिलनाडु के कीलापेरुमपल्लम में स्थित श्री नागनाथस्वामी मंदिर, जिसे केतु स्थलम कहा जाता है, केतु का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।
धार्मिक मान्यता है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने से केतु दोष के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं तथा ज्ञान और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को केतु दोष या कालसर्प दोष हो, तो उसके द्वारा शिवलिंग पर दूध चढ़ाने पर उसका रंग कुछ समय के लिए नीला दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की कृपा और दोष से मुक्ति का संकेत मानते हैं।