पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, महर्षि अंगिरा के पुत्र बृहस्पति बचपन से ही ज्ञान प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहते थे। उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की, वेद-शास्त्रों का गहन अध्ययन किया और धर्म के मार्ग का पालन किया। उनके अद्भुत ज्ञान और तप से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें अपना गुरु बना लिया और तभी से बृहस्पति देवगुरु कहलाए।
नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, विवेक, संतान, भाग्य और गुरु कृपा का कारक माना जाता है। वे धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी है, वे पीले वस्त्र धारण करते हैं और उनका वाहन श्वेत अश्व यानि सफेद घोडा है। गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है, क्योंकि देवगुरु बृहस्पति भगवान विष्णु के परम भक्त माने जाते हैं। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को पीले फूल, पीले वस्त्र, हल्दी और चने की दाल अर्पित की जाती है। साथ ही इस दिन केले के वृक्ष की पूजा का भी विधान है, जिसमें विष्णुजी का वास माना जाता है। गुरुवार के दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को पीली वस्तुओं का दान करने से ज्ञान, विवेक, सौभाग्य और गुरु कृपा प्राप्त होती है।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, महर्षि अंगिरा के पुत्र बृहस्पति बचपन से ही ज्ञान प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहते थे। उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की, वेद-शास्त्रों का गहन अध्ययन किया और धर्म के मार्ग का पालन किया। उनके अद्भुत ज्ञान और तप से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें अपना गुरु बना लिया और तभी से बृहस्पति देवगुरु कहलाए।
नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, विवेक, संतान, भाग्य और गुरु कृपा का कारक माना जाता है। वे धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी है, वे पीले वस्त्र धारण करते हैं और उनका वाहन श्वेत अश्व यानि सफेद घोडा है। गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है, क्योंकि देवगुरु बृहस्पति भगवान विष्णु के परम भक्त माने जाते हैं। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को पीले फूल, पीले वस्त्र, हल्दी और चने की दाल अर्पित की जाती है। साथ ही इस दिन केले के वृक्ष की पूजा का भी विधान है, जिसमें विष्णुजी का वास माना जाता है। गुरुवार के दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को पीली वस्तुओं का दान करने से ज्ञान, विवेक, सौभाग्य और गुरु कृपा प्राप्त होती है।