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मंगल देव क्यों कहलाए शिव पुत्र और भूमिपुत्र ?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के दिव्य तेज को माता पृथ्वी ने धारण किया जिससे एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ। वही बालक आगे चलकर मंगल देव कहलाए। चूँकि उनका पालन-पोषण माता पृथ्वी ने किया इसलिए उन्हें भूमिपुत्र या भौम भी कहा जाता है।


नवग्रहों में मंगल देव को साहस, शक्ति, पराक्रम और आत्मविश्वास का देवता माना जाता है। वे मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप लाल आभा से युक्त है और वाहन है मेष अर्थात भेड़। उनका रत्न मूंगा यानी Red Coral है, जो साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक है।


यूं तो मंगलवार का दिन मंगल देव को समर्पित है लेकिन इस दिन हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हनुमान जी की उपासना करने से मंगल दोष शांत होता है, भय दूर होता है और साहस व बल की प्राप्ति होती है।


मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंगलनाथ मंदिर मंगल देव का सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मंगल दोष से राहत मिलती है और जीवन में सुख, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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नवग्रहों में मंगल देव को साहस, शक्ति, पराक्रम और आत्मविश्वास का देवता माना जाता है। वे मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप लाल आभा से युक्त है और वाहन है मेष अर्थात भेड़। उनका रत्न मूंगा यानी Red Coral है, जो साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक है।


यूं तो मंगलवार का दिन मंगल देव को समर्पित है लेकिन इस दिन हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हनुमान जी की उपासना करने से मंगल दोष शांत होता है, भय दूर होता है और साहस व बल की प्राप्ति होती है।


मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंगलनाथ मंदिर मंगल देव का सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मंगल दोष से राहत मिलती है और जीवन में सुख, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।