Sanskar

आ गई कामिका एकादशी, हरि और हर को एक साथ प्रसन्न करने का अवसर

#ekadashiसावन माह भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है, लेकिन इसी पावन मास में आने वाली कामिका एकादशी भी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु का पूजन करने से साधक पर भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की भी विशेष कृपा बनी रहती है। यह एकादशी पापों का नाश करने वाली, मोक्ष प्रदान करने वाली और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी गई है।

 

कब है कामिका एकादशी ?

 

इस वर्ष 9 अगस्त (रविवार) को कामिका एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु का व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन एवं जागरण भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत अनेक यज्ञों और तीर्थ स्नानों के समान पुण्य प्रदान करता है।

 

कामिका एकादशी का महत्व

 

धार्मिक ग्रंथों में कामिका एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे भी संदर्भ मिलते हैं कि ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद से कहा था कि कामिका एकादशी का महात्म्य सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।

 

मान्यता है कि गंगा, काशी, पुष्कर, नैमिषारण्य और अन्य पवित्र तीर्थों में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वही फल भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से प्राप्त हो सकता है। इसलिए इस एकादशी के व्रत को भक्ति, आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना जाता है।

 

कामिका एकादशी की पौराणिक कथा

 

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का महात्म्य उन्होंने सुन लिया है, अब वे श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में जानना चाहते हैं। तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इस एकादशी का नाम कामिका एकादशी है और इसकी महिमा स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को सुनाई थी।

 

देवर्षि नारद ने ब्रह्माजी से पूछा कि श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम, उसकी पूजा विधि और उसका महत्व क्या है। तब ब्रह्माजी ने कहा कि यह कामिका एकादशी लोक कल्याण करने वाली और महान पुण्य प्रदान करने वाली है। इस दिन भगवान श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन की पूजा करने से मनुष्य को अनेक तीर्थों के दर्शन और यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

 

ब्रह्माजी ने यह भी बताया कि संसार रूपी सागर में डूबे हुए और पापों से घिरे मनुष्यों के लिए कामिका एकादशी का व्रत सबसे श्रेष्ठ उपाय है। इस दिन भगवान विष्णु को श्रद्धापूर्वक तुलसी दल अर्पित करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान विष्णु सोना, चांदी, रत्न और आभूषणों से उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने तुलसी दल अर्पित करने से होते हैं।

 

उन्होंने यह भी बताया कि जो श्रद्धालु कामिका एकादशी की रात्रि में भगवान के मंदिर में दीपदान करते हैं और जागरण करते हैं उनके पितरों को भी उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है। इस व्रत का महात्म्य इतना है कि स्वयं चित्रगुप्त भी इसके पूर्ण फल का वर्णन नहीं कर सकते।

 

कामिका एकादशी की पूजा विधि

 

कामिका एकादशी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें तथा विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें। दिनभर भगवान का स्मरण करते हुए व्रत रखें और संध्या समय दीप प्रज्ज्वलित कर आरती करें। रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।

 

व्रत के नियम

 

कामिका एकादशी के दिन सात्विक दिनचर्या का पालन करना चाहिए। क्रोध, झूठ, निंदा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। अन्य एकादशियों की तरह इस दिन भी अन्न, विशेषकर चावल का सेवन वर्जित माना गया है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, जल या फलाहार व्रत रख सकते हैं। द्वादशी तिथि में शुभ समय पर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का पारण करना चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

 

देशभर में लाखों श्रद्धालु कामिका एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस व्रत को श्रद्धा, नियम और सच्चे मन से करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। विशेष रूप से सावन मास में आने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

 

#sawanekadashi

#ekadashi #sawanekadashi #kamikaekadashi #mahadev #narayan

 

हरि-हर मंत्र

ॐ नमः शिवाय विष्णवे शिवाय विष्णुरूपिणे।
शिवस्य हृदयं विष्णुः विष्णोश्च हृदयं शिवः॥
यथा शिवमयो विष्णुरेवं विष्णुमयः शिवः।
यथान्तरं न पश्यामि तथा मे स्वस्तिरायुषि॥

( अर्थ: भगवान शिव को नमस्कार है और विष्णु को भी नमस्कार है जो शिव रूप ही हैं। शिव का हृदय विष्णु हैं और विष्णु का हृदय शिव हैं। जैसे विष्णु शिवमय हैं, वैसे ही शिव विष्णुमय हैं। जो इन दोनों में कोई भेद या अंतर नहीं देखता, उसे आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।)

 

:- लता रानी

 

Related News

आ गई कामिका एकादशी, हरि और हर को एक साथ प्रसन्न करने का अवसर

#ekadashiसावन माह भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है, लेकिन इसी पावन मास में आने वाली कामिका एकादशी भी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु का पूजन करने से साधक पर भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की भी विशेष कृपा बनी रहती है। यह एकादशी पापों का नाश करने वाली, मोक्ष प्रदान करने वाली और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी गई है।

 

कब है कामिका एकादशी ?

 

इस वर्ष 9 अगस्त (रविवार) को कामिका एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु का व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन एवं जागरण भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत अनेक यज्ञों और तीर्थ स्नानों के समान पुण्य प्रदान करता है।

 

कामिका एकादशी का महत्व

 

धार्मिक ग्रंथों में कामिका एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे भी संदर्भ मिलते हैं कि ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद से कहा था कि कामिका एकादशी का महात्म्य सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।

 

मान्यता है कि गंगा, काशी, पुष्कर, नैमिषारण्य और अन्य पवित्र तीर्थों में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वही फल भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से प्राप्त हो सकता है। इसलिए इस एकादशी के व्रत को भक्ति, आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना जाता है।

 

कामिका एकादशी की पौराणिक कथा

 

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का महात्म्य उन्होंने सुन लिया है, अब वे श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में जानना चाहते हैं। तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इस एकादशी का नाम कामिका एकादशी है और इसकी महिमा स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को सुनाई थी।

 

देवर्षि नारद ने ब्रह्माजी से पूछा कि श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम, उसकी पूजा विधि और उसका महत्व क्या है। तब ब्रह्माजी ने कहा कि यह कामिका एकादशी लोक कल्याण करने वाली और महान पुण्य प्रदान करने वाली है। इस दिन भगवान श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन की पूजा करने से मनुष्य को अनेक तीर्थों के दर्शन और यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

 

ब्रह्माजी ने यह भी बताया कि संसार रूपी सागर में डूबे हुए और पापों से घिरे मनुष्यों के लिए कामिका एकादशी का व्रत सबसे श्रेष्ठ उपाय है। इस दिन भगवान विष्णु को श्रद्धापूर्वक तुलसी दल अर्पित करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान विष्णु सोना, चांदी, रत्न और आभूषणों से उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने तुलसी दल अर्पित करने से होते हैं।

 

उन्होंने यह भी बताया कि जो श्रद्धालु कामिका एकादशी की रात्रि में भगवान के मंदिर में दीपदान करते हैं और जागरण करते हैं उनके पितरों को भी उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है। इस व्रत का महात्म्य इतना है कि स्वयं चित्रगुप्त भी इसके पूर्ण फल का वर्णन नहीं कर सकते।

 

कामिका एकादशी की पूजा विधि

 

कामिका एकादशी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें तथा विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें। दिनभर भगवान का स्मरण करते हुए व्रत रखें और संध्या समय दीप प्रज्ज्वलित कर आरती करें। रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।

 

व्रत के नियम

 

कामिका एकादशी के दिन सात्विक दिनचर्या का पालन करना चाहिए। क्रोध, झूठ, निंदा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। अन्य एकादशियों की तरह इस दिन भी अन्न, विशेषकर चावल का सेवन वर्जित माना गया है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, जल या फलाहार व्रत रख सकते हैं। द्वादशी तिथि में शुभ समय पर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का पारण करना चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

 

देशभर में लाखों श्रद्धालु कामिका एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस व्रत को श्रद्धा, नियम और सच्चे मन से करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। विशेष रूप से सावन मास में आने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

 

#sawanekadashi

#ekadashi #sawanekadashi #kamikaekadashi #mahadev #narayan

 

हरि-हर मंत्र

ॐ नमः शिवाय विष्णवे शिवाय विष्णुरूपिणे।
शिवस्य हृदयं विष्णुः विष्णोश्च हृदयं शिवः॥
यथा शिवमयो विष्णुरेवं विष्णुमयः शिवः।
यथान्तरं न पश्यामि तथा मे स्वस्तिरायुषि॥

( अर्थ: भगवान शिव को नमस्कार है और विष्णु को भी नमस्कार है जो शिव रूप ही हैं। शिव का हृदय विष्णु हैं और विष्णु का हृदय शिव हैं। जैसे विष्णु शिवमय हैं, वैसे ही शिव विष्णुमय हैं। जो इन दोनों में कोई भेद या अंतर नहीं देखता, उसे आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।)

 

:- लता रानी