Sanskar

यहां राधा रानी के साथ नहीं, बल्कि रुक्मिणी के साथ विराजमान हैं श्री कृष्ण

श्री कृष्ण के यूं तो देशभर में कई मंदिर पाए जाते हैं, और इन मंदिरों में कहीं कान्हा अपनी प्रिय राधा रानी के साथ विराजमान हैं तो कहीं अपने भाई बलराम के साथ। जिनमें से ज़्यादातर मंदिरों में वे राधा रानी के साथ ही पाए जाते हैं। श्री कृष्ण की 16,108 पटरानियां होते हुए भी उनको उनकी पत्नियों के साथ बहुत कम देखा जाता है। तो आईए आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं जहां वो राधा रानी के साथ नहीं बल्कि अपनी पत्नी रुक्मिणी के साथ विराजमान हैं। इस मंदिर से लोगों की असीम आस्थाएं जुड़ी हैं। इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां श्री कृष्ण की अर्धांगिनी रुक्मिणी के अलावा उन्हें किसी और के साथ नहीं पूजा जाता। चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित विट्ठल रूक्मिणी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर पूर्व दिशा में भीमा नदी के किनारे पर स्थित है। महाराष्ट्र में इस नदी को चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है। चैत्र, माघ आदि माह के दौरान तट के किनारे विशाल मेला लगता है, और नदी में स्नान करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। साथ ही इस मेले में हरि नाम संकीर्तन कर भगवान विट्ठल को प्रसन्न किया जाता है। -यहां हैं काले रंग की सुंदर प्रतिमाएं मंदिर परिसर में भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी की काले रंग की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो देखने में बेहद आकर्षित हैं। - यहां लोग करते हैं दिंडी यात्रा भगवान विट्ठल को प्रसन्न करने के लिए भक्त यहां दूर-दूर से मंदिर तक पैदल यात्रा करके आते हैं, जिसे दिंडी यात्रा कहा जाता है। लोक मान्यता के अनुसार इस यात्रा को आषाढ़ी एकादशी या कार्तिक एकादशी के दौरान मंदिर परिसर में किया जाता है। यही वजह है कि भक्त इन दिनों से कुछ दिन पूर्व इस यात्रा को शुरु कर देते हैं, ताकि समय पर यात्रा संपन्न हो सके। मान्यता के अनुसार यह मंदिर देशभर में ख्याति पा चुका है और लोगों का मानना है कि भगवान विट्ठल अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए कई युगों से खड़े हैं और ऐसे ही कई युगों तक खड़े रहेंगे। -पौराणिक कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में देवी रुक्मिणी, श्रीकृष्ण से रुठकर इस जगह पर तपस्या करने आईं थीं। और जब भगवान उन्हें मनाने यहां आए तो उन्हें अपने भक्त पुंडलिक का भी स्मरण आया, तो श्री कृष्ण उन्हें दर्शन देने वहीं ठहर गए और देवी रुक्मिणी भी उनकी प्रतीक्षा में वहीं उनके समीप खड़ी रह गईं। आज कई युग बीत गए हैं, लेकिन इस मंदिर में भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी यहीं खड़े हैं। दूर-दूर से भक्त भगवान के दर्शन के लिए इस मंदिर में आते हैं। मान्यता के अनुसार जो भी भक्त भगवान से यहां कुछ मांगता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।