सीहोर का कुबेरेश्वर धाम : ग्रीन शिवरात्रि की थीम पर होगा ‘रुद्राक्ष महोत्सव’
मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय स्थित ‘कुबेरेश्वर धाम’ इस वर्ष आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। इस बार 14 से 20 फरवरी तक यहां आयोजित होने वाला भव्य ‘रुद्राक्ष महोत्सव’ ग्रीन शिवरात्रि की विशेष थीम के साथ मनाया जाएगा। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सान्निध्य में होने वाला यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश देगा। यह प्रसिद्ध और चमत्कारी शिव मंदिर अपनी 111 फीट ऊंचे शिवलिंग और अभिमंत्रित रुद्राक्ष के वितरण के लिए जाना जाता है । यहां केदारनाथ धाम की तरह एक केदारशिला भी है, जिसका पूजन किया जाता है।
आयोजन के तहत महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देश-विदेश में एक करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यह आयोजन ऐतिहासिक बन जाएगा। पं. प्रदीप मिश्रा के अनुसार भगवान शिव केवल देवों के देव नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के भी आराध्य देव हैं। आज जब पूरी दुनिया प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रही है, ऐसे समय में शिवरात्रि को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने घर या आसपास कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी तस्वीर साझा करें। पंडित मिश्रा ने कहा- “एक लोटा जल शिवलिंग पर और एक लोटा जल पेड़-पौधों को अर्पित करना ही ग्रीन शिवरात्रि का सच्चा संदेश है।”
इस वर्ष कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियां भी भव्य स्तर पर की गई हैं। लगभग 1 लाख 80 हजार वर्गफीट क्षेत्र में विशाल पक्का पंडाल बनाया गया है, जिसमें एक साथ करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु बैठकर कथा का श्रवण कर सकेंगे। प्रवेश और निकास के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है ताकि किसी को परेशानी न हो। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है। 10 एकड़ क्षेत्र में विशाल भोजनशाला बनाई गई है, जहां चार अलग-अलग कतारों में निशुल्क और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। एक लीटर पानी की बोतल मात्र पांच रुपये में दी जाएगी। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन से कुबेरेश्वर धाम तक लगभग 20 अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस और प्राथमिक उपचार केंद्र बनाए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे के सहयोग से विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। ये ट्रेनें महोत्सव से एक सप्ताह पहले और एक सप्ताह बाद तक चलेंगी। वहीं स्थानीय ऑटो और मिनी बसों के किराये प्रशासन द्वारा तय किए गए हैं ताकि यात्रियों से मनमाना किराया न वसूला जाए। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है और धाम परिसर में 256 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मोबाइल नेटवर्क की समस्या से बचने के लिए अस्थायी टावर लगाए जा रहे हैं। वहीं बुजुर्ग और असहाय श्रद्धालुओं के लिए विशेष एम्बुलेंस सुविधा होगी, जिससे वे सीधे कथा स्थल तक पहुंच सकेंगे।
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग संतों का आगमन होगा। 17 फरवरी को पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वरधाम सरकार) का कुबेरेश्वर धाम आगमन विशेष आकर्षण रहेगा। इसके अलावा विभिन्न दिवसों पर अन्य विशिष्ट अतिथि भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। कुल मिलाकर, इस वर्ष कुबेरेश्वर धाम का रुद्राक्ष महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का मजबूत संदेश देगा। ‘ग्रीन शिवरात्रि’ की यह पहल शिवभक्ति के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेकर आने वाले समय के लिए एक मिसाल बनेगी।
सीहोर का कुबेरेश्वर धाम : ग्रीन शिवरात्रि की थीम पर होगा ‘रुद्राक्ष महोत्सव’
मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय स्थित ‘कुबेरेश्वर धाम’ इस वर्ष आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। इस बार 14 से 20 फरवरी तक यहां आयोजित होने वाला भव्य ‘रुद्राक्ष महोत्सव’ ग्रीन शिवरात्रि की विशेष थीम के साथ मनाया जाएगा। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सान्निध्य में होने वाला यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश देगा। यह प्रसिद्ध और चमत्कारी शिव मंदिर अपनी 111 फीट ऊंचे शिवलिंग और अभिमंत्रित रुद्राक्ष के वितरण के लिए जाना जाता है । यहां केदारनाथ धाम की तरह एक केदारशिला भी है, जिसका पूजन किया जाता है।
आयोजन के तहत महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देश-विदेश में एक करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यह आयोजन ऐतिहासिक बन जाएगा। पं. प्रदीप मिश्रा के अनुसार भगवान शिव केवल देवों के देव नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के भी आराध्य देव हैं। आज जब पूरी दुनिया प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रही है, ऐसे समय में शिवरात्रि को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने घर या आसपास कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी तस्वीर साझा करें। पंडित मिश्रा ने कहा- “एक लोटा जल शिवलिंग पर और एक लोटा जल पेड़-पौधों को अर्पित करना ही ग्रीन शिवरात्रि का सच्चा संदेश है।”
इस वर्ष कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियां भी भव्य स्तर पर की गई हैं। लगभग 1 लाख 80 हजार वर्गफीट क्षेत्र में विशाल पक्का पंडाल बनाया गया है, जिसमें एक साथ करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु बैठकर कथा का श्रवण कर सकेंगे। प्रवेश और निकास के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है ताकि किसी को परेशानी न हो। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है। 10 एकड़ क्षेत्र में विशाल भोजनशाला बनाई गई है, जहां चार अलग-अलग कतारों में निशुल्क और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। एक लीटर पानी की बोतल मात्र पांच रुपये में दी जाएगी। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन से कुबेरेश्वर धाम तक लगभग 20 अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस और प्राथमिक उपचार केंद्र बनाए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे के सहयोग से विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। ये ट्रेनें महोत्सव से एक सप्ताह पहले और एक सप्ताह बाद तक चलेंगी। वहीं स्थानीय ऑटो और मिनी बसों के किराये प्रशासन द्वारा तय किए गए हैं ताकि यात्रियों से मनमाना किराया न वसूला जाए। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है और धाम परिसर में 256 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मोबाइल नेटवर्क की समस्या से बचने के लिए अस्थायी टावर लगाए जा रहे हैं। वहीं बुजुर्ग और असहाय श्रद्धालुओं के लिए विशेष एम्बुलेंस सुविधा होगी, जिससे वे सीधे कथा स्थल तक पहुंच सकेंगे।
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग संतों का आगमन होगा। 17 फरवरी को पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वरधाम सरकार) का कुबेरेश्वर धाम आगमन विशेष आकर्षण रहेगा। इसके अलावा विभिन्न दिवसों पर अन्य विशिष्ट अतिथि भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। कुल मिलाकर, इस वर्ष कुबेरेश्वर धाम का रुद्राक्ष महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का मजबूत संदेश देगा। ‘ग्रीन शिवरात्रि’ की यह पहल शिवभक्ति के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेकर आने वाले समय के लिए एक मिसाल बनेगी।