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देश भर में इन दिनों महाशिवरात्रि पर्व (15 फरवरी) की तैयारियां चल रही हैं । ऐसी ही तैयारी राजस्थान के सीकर के एक प्रसिद्ध मंदिर में भी हो रही हैं जहां की शिव बारात अनूठी होगी । धूमधाम से निकालने वाली बारात में ‘अघोरी झांकी’ और ‘शिव परिवार की झांकी’ प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहेगी। यह मंदिर है श्रीकल्याण धाम, जहां हाल ही में पूरे आयोजन के विवरण के साथ पोस्टर का विमोचन महंत विष्णु प्रसाद शर्मा के सान्निध्य में किया गया था। मंदिर व्यवस्थापक रवि प्रसाद शर्मा के अनुसार महाशिवरात्रि महोत्सव चार दिनों तक चलेगा।
कार्यक्रम के तहत 12 फरवरी से 11 लाख पंचाक्षरी जाप की शुरुआत होगी। 14 फरवरी को शाम 7 बजे भगवान शिव की महाआरती होगी। 15 फरवरी को सुबह सवा 8 बजे महाआरती, साढ़े 8 बजे जाप समर्पण, सवा 9 बजे संत रामचंद्र दास महाराज का समाधि पूजन तथा सुबह 10 बजे से रुद्राभिषेक किया जाएगा। इसी दिन शाम 5 बजे भगवान शिव की बारात मुख्य मार्गों से होते हुए श्री कल्याण धाम पहुंचेगी। शिव बारात के समापन के बाद भगवान शिव की महाआरती की जाएगी। महाशिवरात्रि आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां तेज हो गई हैं। बाकायदा बैठक करके सभी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
राजस्थान का सीकर जिला अपनी सांस्कृतिक विरासत, शैक्षिक पृष्ठभूमि और वीरता की गाथाओं के लिए जाना जाता है। यहां स्थित प्राचीन मंदिरों और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराएं क्षेत्र की पहचान को विशेष बनाती हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख धार्मिक स्थल है सीकर का ‘श्री कल्याण जी मंदिर’, जो लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र हुआ है।
क्यों प्रसिद्ध है मंदिर ?
श्री कल्याण जी मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां विवाह में विलंब या बाधाओं से परेशान लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के चलते दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपने अनुभव साझा करते दिखाई देते हैं। इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता है कि यहां लक्ष्मी माता और भगवान विष्णु के अलग-अलग मंदिर बने हुए हैं। दिन के समय दोनों देवताओं की पूजा अलग-अलग स्थानों पर होती है, जबकि रात में लक्ष्मी माता भगवान विष्णु के मंदिर में विश्राम करती हैं। यह परंपरा न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश में इस मंदिर को अलग पहचान दिलाती है।
श्री कल्याण जी मंदिर का निर्माण वर्ष 1921 में सीकर के अंतिम शासक राव राजा कल्याण सिंह ने करवाया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार लक्ष्मी माता ने स्वप्न में राजा को दर्शन देकर अपने लिए अलग मंदिर बनवाने की इच्छा प्रकट की थी। इसके बाद इस मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर स्थापना के बाद राव राजा कल्याण सिंह प्रतिदिन यहां दर्शन के लिए आते थे और मंदिर परिसर में बैठकर आम लोगों की समस्याएं भी सुनते थे।
वर्तमान समय में मंदिर की पूजा-अर्चना का कार्य चौथी पीढ़ी के महंत ‘सनातन रत्न’ विष्णु प्रसाद शर्मा द्वारा किया जा रहा है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह से रात तक छह बार विधिवत आरती की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर की आकर्षक वास्तुकला, दीवारों पर बने धार्मिक चित्र और गर्भगृह इसकी भव्यता को अलौकिक रूप से दर्शाते हैं।

