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न जागरण, न कीर्तन, न डीजे । तेज म्यूजिक, कृत्रिम रौशनी की अठखेलियां और एक साथ थिरकते कदम । नये जमाने का नया फॉर्मेट । भक्ति संगीत का एक नया झोंका । जमीन से जुड़ा और प्रासंगिक । जेन-जी की पसंद और सोशल मीडिया का नया लाइव कंटेंट । भजन प्रस्तुत करने का नया तरीका । रातों-रात लोकप्रिय हुआ एक स्प्रीचुअल म्यूजिक कॉन्सर्ट। झूमने-झुमाने पर ज्यादा जोर । बेहतरीन साउंड, आधुनिक प्रकाश और देसी-विदेशी वाद्ययंत्रों का संगम । एक नॉन-स्टॉप म्यूजिकल शो । विशेषकर युवाओं को भजन की दुनिया से जोड़ने का नया मॉडल । एक बिल्कुल नया सांस्कृतिक बदलाव ।
पॉजिटिव वाइब्स, एनर्जेटिक एंबीएंस
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी । शोर ज्यादा, सुकून बहुत कम । ऐसे में ठंडे झोंके की तरह कोई आवाज़ युवाओं को बुलाए। सुनाये उन्हें राहत भरा संगीत । जोड़े खुद से....ईश्वर से । जहां सुर हों नये, भावना हो सच्ची । वाइव्ज हों पॉजिटिव, एंबीएंस हो एनर्जेटिक। मेंटल पीस, स्पिरिचुअल चार्ज और सोल-लेवल कनेक्शन । स्क्रॉल करती ऊंगलियों का आराम । नोटिफिकेशन्स को स्टॉप । रील्स, लाइक, कमेंट, फारवर्ड को विश्राम। टाइम pause करने का
और खुद से जुड़ने का। क्योंकि यहां है कनेक्शन, पीस और थोड़ा-सा रियल फील । स्वरों से बिखरती भक्ति और यूथ एनर्जी से जुड़ता म्यूजिक ।
भजनों का फ्यूजन
परिवर्तन प्रकृति का नियम है । नई चीजें आती हैं, पुरानी इतिहास बनती जाती हैं । इसी प्रक्रिया का नया किरदार है भजन क्लबिंग, जहां क्लबिंग शब्द के दो अर्थ मिलते हैं । एक, ‘क्लब’ करना अर्थात एक-दूसरे को जोड़ना । दूसरा, क्लब यानी जहां लोग इकट्ठा होकर मनोरंजन करते हैं । इन अर्थों में यहां लोग इकट्ठा तो होते हैं लेकिन भजन के माध्यम से पॉजिटिव वाइब्स पाने के लिए । जहां कई छोटे-छोटे भजनों को आपस में क्लब कर दिया जाता है, बिल्कुल फ्यूजन की तरह ताकि शो लगातार चलता रहे और नीरसता न आने पाये ।
पारंपरिक-आधुनिक संगीत शैली का संगम
नई बात ये भी है कि इसमें फील तो कॉन्सर्ट वाला मिलता है लेकिन गायक-वादक वृंद का पहनावा पारंपरिक होता है । पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों के साथ आधुनिक वाद्य यंत्र जैसे – कीबोर्ड, इलेक्ट्रिक-स्पेनिश गिटार और ड्रम का भी उपयोग होता है । खासकर, बांसुरी का अद्भुत इस्तेमाल दिखता है, जो सुरीला और कर्णप्रिय होने के बाद भी अब तक बड़ा एकाकी और सौम्य वाद्य यंत्र माना जाता है । बांसुरी छा जाती है । खासकर तब जब मुरलीवाले की बात हो रही हो । भक्ति संगीत में बांसुरी के बिना खालीपन सा रहता है । भजन क्लबिंग को दिलों में उतारने में बांसुरी के स्वर लीड करने लगते हैं ।
सनातन से जुड़ते जेन-जी और मिलेनियल्स
ये एक एक नितांत नवीन अवधारणा है जो बड़े शहरों में नए धार्मिक-सांस्कृतिक परिवर्तन गढ़ रहा है । इसका एक बड़ा कारण युवाओं का इसकी ओर आकर्षित होना है । उन्हें थिरकने और झूमने का अवसर मिलता है और उन्हें उतना ही आनंद मिलता है जितना शायद किसी रॉक बैंड की परफॉर्मेंस में मिलता है । अच्छी बात है कि इसके माध्यम से युवाओं, विशेषकर जेन-जी और मिलेनियल्स पीढ़ी सनातन संस्कृति से जुड़ रही है । यहां नाइट क्लब सी चकाचौंध तो होती है लेकिन नशे की जगह होती है भक्ति संगीत का उल्लास । इसका उद्देश्य ईश्वर की संगीतिक स्तुति को सामूहिक अनुभव में बदल देना है । भक्ति और नामजप से श्रोताओं को ऊर्जा और पॉजिटिव वाइब्स मिलती है, जिसकी उन्हें जरूरत है । हालांकि भक्ति और संगीत की ये नई जुगलबंदी सभी पीढ़ियों को प्रभावित करती है।
अभूतपूर्व उत्साह से भरा नया ट्रेंड
दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे मेट्रो शहरों में हाल ही में हुई भजन क्लबिंग नाइट्स में उमड़ी भीड़ का जोश बताता है कि कैसे ये ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ऐसा नहीं है कि भारत में भजनों पर आधारित बैंड्स नहीं थे या कम थे । लेकिन जो उफान और जो बदलाव अभी दृष्टिगोचर है वो उत्साह से भरा और अभूतपूर्व है । इससे और साफ हो गया कि आध्यात्मिक संगीत बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींच सकता है।
सोशल मीडिया का सपोर्ट सिस्टम
इस कॉसेप्ट का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम है सोशल मीडिया । सभी बैंड्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब इत्यादि पर सक्रिय है, जहां उनके ऊर्जावान प्रदर्शनों के वीडियो अक्सर वायरल हो होते रहते हैं। भक्ति, संगीत और युवापीढ़ी पहले भी थी लेकिन सोशल मीडिया इस रूप में नहीं था । एक गैप था जिसे भजन क्लबिंग ने कुछ हद तक भरा । आज की सोशल मीडिया, सेल्फी, लाइव और रील्स की दुनिया में नई पीढ़ी सार्वजनिक रूप से आस्था व्यक्त करने में अपेक्षाकृत अधिक सहज महसूस कर रही है। नई पीढ़ी न केवल ऐसे आयोजनों में प्राणवायु फूंक रही है बल्कि इसे लेकर जिज्ञासु भी है । यही वजह है कि ये फॉर्मेट लंबे समय तक टिकने का माद्दा रखता है ।
भजन वही, अंदाज नया
आखिर ‘शिव तांडव’ जैसा प्रभावशाली स्तोत्र जब मंच से भरपूर संगीत के साथ प्रस्तुत हो तो कौन शिवभक्ति में लीन हुए बिना रह पाएगा ? जब अखिल कोटि ब्रहांड नायक श्रीकृष्ण और अखिल ब्रहांड की स्वामिनी राधा रानी की महिमा संगीत और सुरों के माध्यम से प्रसारित हों तो भला कौन मन ही मन वृंदावन नहीं पहुंच जाएगा ? राधा-मोहन की भक्ति के आख्यानों से उपजे भजन भक्तों को विशेष प्रिय रहे हैं । ब्रज की होली का रंग कौन विस्मृत कर सकता है और बांके बिहारी की निराली छवि कौन नहीं संजोना चाहेगा ? कौन एक शाम राम-कृष्ण के गुण गाकर सकारात्मकता नहीं पाना चाहेगा ? हनुमान जी के भजन की असीम ऊर्जा से कौन वंचित रहना चाहेगा ? अगर ये सब एक शाम को एक ही स्थान पर मिल जाए, तो हर किसी का ऐसे मंच की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है । वैसे भी भजन और भोजन में संकोच नहीं करते ।
‘मन की बात’ में भजन क्लबिंग पे चर्चा
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में भजन क्लबिंग के बढ़ते ट्रेंड पर संतोष और आनंद जाहिर करते हुए नई पीढ़ी के लिए इसकी आवश्यकता पर जोर दिया था । प्रधानमंत्री के अनुसार “ आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और जीवनशैली में ढाल लिया है । आजकल युवा इकट्ठे हो रहे हैं, वहां भजन होता है, रोशनी होती है और भक्तिभाव से भजन गाये जाते हैं ।“ उन्होंने कहा कि “अच्छी बात ये है कि इन भजन क्लबिंग में भक्ति भाव को हल्केपन में नहीं लिया जाता और न ही शब्दों की मर्यादा टूटती है।“ इसी तरह कई राज्य सरकारें अब इसे प्रमोट करने की योजना बना रही हैं । निकट भविष्य में दिल्ली सरकार की ओर से ऐसे कार्यक्रम करवाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है । हाउसिंग सोसाइटीज, पार्क, कॉफी शॉप लॉउंज, कॉलेज कैंटीन और हॉस्टल से लेकर बाकायदा किसी बैंक्वेट हॉल को बुक करके भी ऐसे कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

