काडु मल्लेश्वर मंदिर : आज भी अज्ञात है नंदी के मुख से बहती जलधारा का स्तोत्र
15 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों का रुख करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेंगलुरु में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर है, जहां शिवलिंग पर लगातार जलधारा बहती रहती है और उस जल का स्रोत आज तक रहस्य बना हुआ है?
बेंगलुरु के मल्लेश्वरम इलाके में स्थित काडु मल्लेश्वर मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं और रहस्यमयी जलधारा के लिए प्रसिद्ध है। काडु का अर्थ है ‘वन’ और काडु मल्लेश्वर का अर्थ है ‘वन के स्वामी मल्लेश्वर’। मल्लेश्वर अर्थात भगवान शिव के पर्याय । इस मंदिर की तुलना 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से की जाती है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग भगवान मल्लिकार्जुन का ही स्वरूप है।
इतिहास के अनुसार, मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में मराठा राजा छत्रपति शिवाजी के भाई वेंकोजी द्वारा कराया गया था। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर में मराठा और द्रविड़ स्थापत्य शैली की भव्य बनावट सुंदर नक्काशी के साथ देखने को मिलती है। मंदिर परिसर के पास ही स्थित है ‘श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र’, जिसे दर्शन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, काडु मल्लेश्वर मंदिर की पूजा का पूर्ण फल तभी मिलता है जब श्रद्धालु दक्षिणामुख नंदी तीर्थ के दर्शन कर लेते हैं। यहां नंदी महाराज की प्राचीन पत्थर से बनी प्रतिमा है, जिसके मुख से निरंतर साफ और ठंडे पानी की धारा निकलती रहती है। यह जलधारा सीधे शिवलिंग पर गिरती है और बिना रुके जलाभिषेक करती रहती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जल का स्रोत आज तक पता नहीं चल सका है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कई बार जांच की, लेकिन कोई भी यह नहीं बता सका कि पानी आखिर आता कहां से है। जलधारा केवल नंदी महाराज के मुख से ही निकलती है, जिसे भक्त आस्था और चमत्कार का प्रतीक मानते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। यही कारण है कि महाशिवरात्रि और सावन के महीने में मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां 15 दिनों का मूंगफली मेला भी आयोजित होता है। साथ ही मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया जाता है, भगवान शिव की रथ यात्रा निकाली जाती है और विशेष अभिषेक किए जाते हैं।
आस्था, इतिहास और रहस्य, तीनों का संगम है बेंगलुरु का काडु मल्लेश्वर मंदिर। जहां विज्ञान आज भी सवालों में उलझा है, वहीं भक्तों का विश्वास अडिग है। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र बनता है, बल्कि यह याद दिलाता है कि आस्था के आगे कई रहस्य आज भी मौन हैं।
काडु मल्लेश्वर मंदिर : आज भी अज्ञात है नंदी के मुख से बहती जलधारा का स्तोत्र
15 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों का रुख करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेंगलुरु में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर है, जहां शिवलिंग पर लगातार जलधारा बहती रहती है और उस जल का स्रोत आज तक रहस्य बना हुआ है?
बेंगलुरु के मल्लेश्वरम इलाके में स्थित काडु मल्लेश्वर मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं और रहस्यमयी जलधारा के लिए प्रसिद्ध है। काडु का अर्थ है ‘वन’ और काडु मल्लेश्वर का अर्थ है ‘वन के स्वामी मल्लेश्वर’। मल्लेश्वर अर्थात भगवान शिव के पर्याय । इस मंदिर की तुलना 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से की जाती है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग भगवान मल्लिकार्जुन का ही स्वरूप है।
इतिहास के अनुसार, मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में मराठा राजा छत्रपति शिवाजी के भाई वेंकोजी द्वारा कराया गया था। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर में मराठा और द्रविड़ स्थापत्य शैली की भव्य बनावट सुंदर नक्काशी के साथ देखने को मिलती है। मंदिर परिसर के पास ही स्थित है ‘श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र’, जिसे दर्शन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, काडु मल्लेश्वर मंदिर की पूजा का पूर्ण फल तभी मिलता है जब श्रद्धालु दक्षिणामुख नंदी तीर्थ के दर्शन कर लेते हैं। यहां नंदी महाराज की प्राचीन पत्थर से बनी प्रतिमा है, जिसके मुख से निरंतर साफ और ठंडे पानी की धारा निकलती रहती है। यह जलधारा सीधे शिवलिंग पर गिरती है और बिना रुके जलाभिषेक करती रहती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जल का स्रोत आज तक पता नहीं चल सका है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कई बार जांच की, लेकिन कोई भी यह नहीं बता सका कि पानी आखिर आता कहां से है। जलधारा केवल नंदी महाराज के मुख से ही निकलती है, जिसे भक्त आस्था और चमत्कार का प्रतीक मानते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। यही कारण है कि महाशिवरात्रि और सावन के महीने में मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां 15 दिनों का मूंगफली मेला भी आयोजित होता है। साथ ही मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया जाता है, भगवान शिव की रथ यात्रा निकाली जाती है और विशेष अभिषेक किए जाते हैं।
आस्था, इतिहास और रहस्य, तीनों का संगम है बेंगलुरु का काडु मल्लेश्वर मंदिर। जहां विज्ञान आज भी सवालों में उलझा है, वहीं भक्तों का विश्वास अडिग है। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र बनता है, बल्कि यह याद दिलाता है कि आस्था के आगे कई रहस्य आज भी मौन हैं।