राम मंदिर : प्राण प्रतिष्ठा के 2 साल, राम रंग में रंगी है अयोध्या
22 जनवरी 2024 को श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ अयोध्या से लेकर देश के कोने-कोने तक “जय श्रीराम” का जयघोष गूंज उठा था। प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ (प्रतिष्ठा द्वादशी) के अवसर पर पूरी अयोध्या नगरी को फूलों और दीपों से सजाया गया है और राम मंदिर में विशेष अभिषेक और महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर को “नए कालचक्र का उदय” बताते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव कहा है।
सदियों की प्रतीक्षा, आस्था के संघर्ष और ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के बाद सरयू तट पर बसी पावन नगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पूरे वैभव के साथ देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर खड़ा है। यह मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आस्था, परंपरा और एकता का सशक्त प्रतीक बन चुका है। हाल ही में 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री के करकमलों से शिखर पर दिव्य ध्वजा फहराई गई ।
लगभग 1,600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भव्य मंदिर के निर्माण कार्य की शुरुआत 15 जनवरी 2021 को हुई थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन किया गया था। आज, यद्यपि मंदिर परिसर के कुछ कार्य अभी प्रगति पर हैं, फिर भी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अपनी दिव्य भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ विश्व भर अयोध्या का गौरव बढ़ा रहा है।
परिसर में हुए महत्वपूर्ण कार्य
पिछले दो वर्षों के दौरान राम जन्मभूमि परिसर में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए गए हैं। मुख्य मंदिर का निर्माण कार्य अब पूर्ण हो चुका है। गर्भगृह में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला विराजमान हैं और यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर की पहली मंजिल पर राम परिवार की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। श्रद्धालुओं की परिक्रमा के लिए लगभग 800 मीटर लंबी परिक्रमा दीवार बनाई गई है, जिसमें भगवान शिव, गणेश, सूर्य, हनुमान, देवी भगवती और माता अन्नपूर्णा को समर्पित मंदिर भी शामिल हैं। मंदिर के शिखर पर पवित्र ‘ॐ’ का चिन्ह, सूर्य और कोविदार वृक्ष से प्रेरित ध्वज स्थापित किया गया है, जो इसकी आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करता है। जल्द ही यहां सप्तऋषि व अन्य पूरक मंदिरों में भी दर्शन-पूजन शुरू हो जाएगा ।
श्रमिकों का होगा सम्मान
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित करने की भी तैयारी की जा रही है। ट्रस्ट मार्च महीने में लगभग 400 श्रमिकों को सम्मानित करेगा। यह सम्मान समारोह 19 मार्च को प्रस्तावित है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी आमंत्रित किया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर का व्यापक विकास किया गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया है। परिसर में बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के माध्यम से और मजबूत किया गया है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल भी विकसित किए जा रहे हैं जहां आधुनिक म्यूरल्स, चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से श्रीराम के जीवन की झलक सरल भाषा और दृश्य रूप में प्रस्तुत की जाएगी।
राम मंदिर : प्राण प्रतिष्ठा के 2 साल, राम रंग में रंगी है अयोध्या
22 जनवरी 2024 को श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ अयोध्या से लेकर देश के कोने-कोने तक “जय श्रीराम” का जयघोष गूंज उठा था। प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ (प्रतिष्ठा द्वादशी) के अवसर पर पूरी अयोध्या नगरी को फूलों और दीपों से सजाया गया है और राम मंदिर में विशेष अभिषेक और महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर को “नए कालचक्र का उदय” बताते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव कहा है।
सदियों की प्रतीक्षा, आस्था के संघर्ष और ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के बाद सरयू तट पर बसी पावन नगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पूरे वैभव के साथ देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर खड़ा है। यह मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आस्था, परंपरा और एकता का सशक्त प्रतीक बन चुका है। हाल ही में 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री के करकमलों से शिखर पर दिव्य ध्वजा फहराई गई ।
लगभग 1,600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भव्य मंदिर के निर्माण कार्य की शुरुआत 15 जनवरी 2021 को हुई थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन किया गया था। आज, यद्यपि मंदिर परिसर के कुछ कार्य अभी प्रगति पर हैं, फिर भी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अपनी दिव्य भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ विश्व भर अयोध्या का गौरव बढ़ा रहा है।
परिसर में हुए महत्वपूर्ण कार्य
पिछले दो वर्षों के दौरान राम जन्मभूमि परिसर में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए गए हैं। मुख्य मंदिर का निर्माण कार्य अब पूर्ण हो चुका है। गर्भगृह में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला विराजमान हैं और यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर की पहली मंजिल पर राम परिवार की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। श्रद्धालुओं की परिक्रमा के लिए लगभग 800 मीटर लंबी परिक्रमा दीवार बनाई गई है, जिसमें भगवान शिव, गणेश, सूर्य, हनुमान, देवी भगवती और माता अन्नपूर्णा को समर्पित मंदिर भी शामिल हैं। मंदिर के शिखर पर पवित्र ‘ॐ’ का चिन्ह, सूर्य और कोविदार वृक्ष से प्रेरित ध्वज स्थापित किया गया है, जो इसकी आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करता है। जल्द ही यहां सप्तऋषि व अन्य पूरक मंदिरों में भी दर्शन-पूजन शुरू हो जाएगा ।
श्रमिकों का होगा सम्मान
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित करने की भी तैयारी की जा रही है। ट्रस्ट मार्च महीने में लगभग 400 श्रमिकों को सम्मानित करेगा। यह सम्मान समारोह 19 मार्च को प्रस्तावित है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी आमंत्रित किया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर का व्यापक विकास किया गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया है। परिसर में बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के माध्यम से और मजबूत किया गया है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल भी विकसित किए जा रहे हैं जहां आधुनिक म्यूरल्स, चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से श्रीराम के जीवन की झलक सरल भाषा और दृश्य रूप में प्रस्तुत की जाएगी।