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वैष्णो देवी धाम का प्राचीन गुफा मार्ग खुला, 40 दिन होंगे दिव्य दर्शन

 

जम्मू के कटरा स्थित मां वैष्णो देवी धाम से श्रद्धालुओं के लिए एक शुभ समाचार सामने आया है। मकर संक्रांति के दिन से मां वैष्णो देवी का प्राचीन गुफा मार्ग श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के खुलने से भक्त एक बार फिर ऐतिहासिक गुफा के रास्ते गर्भगृह तक पहुंचकर मां की पवित्र पिंडियों के दर्शन कर पा रहे हैं।

 

यह प्राचीन गुफा मार्ग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस गुफा में मां भगवती का दिव्यवास है और यहां दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि भक्त सालभर इस पावन मार्ग के खुलने का इंतजार करते हैं। यह गुफा हर वर्ष केवल एक बार खोली जाती है और इस बार यह लगभग 40 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए खुली रहेगी।

 

मंदिर प्रशासन और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा यह निर्णय मकर संक्रांति से पहले लिया गया था, ताकि त्योहार और आगे आने वाले व्यस्त दिनों में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्राचीन मार्ग के खुलने से न केवल भीड़ प्रबंधन में मदद मिल रही है, बल्कि भक्तों को पारंपरिक और पूजनीय मार्ग से दर्शन का अवसर भी मिल रहा है।

 

श्रद्धालुओं के लिए यह गुफा प्रतिदिन दो समय खोली जा रही है। सुबह लगभग एक घंटे के लिए और रात में 10 बजे के आसपास एक घंटे के लिए । सीमित समय और संख्या के कारण श्रद्धालुओं को निर्धारित नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। श्राइन बोर्ड की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

 

प्राचीन गुफा मार्ग का दिव्य महत्व

 

माता वैष्णो देवी का पावन मंदिर कटड़ा से लगभग 14 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई के बाद आता है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कई ऐसे दिव्य स्थल मिलते हैं जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। इनमें बाणगंगा, अर्द्धकुंवारी और सांझी छत प्रमुख हैं। अर्द्धकुंवारी गुफा का महत्व माता के मुख्य भवन के समान ही माना जाता है। मान्यता है कि मां वैष्णो देवी ने इसी गुफा में कन्या रूप में लगभग 9 महीनों तक तपस्या की थी। इसी कारण इस गुफा को ‘गर्भजून’ भी कहा जाता है। यह स्थान भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र है।

 

वहीं माता रानी के मुख्य भवन में माता वैष्णो देवी पिंडियों के रूप में विराजमान हैं और यहां उनके देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी तथा देवी काली के स्वरूप में दर्शन होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर मां वैष्णो देवी ने भैरवनाथ का वध किया था। वर्तमान समय में श्रद्धालु जिस मार्ग से माता के दर्शन करते हैं, वह गुफा में प्रवेश का प्राकृतिक मार्ग नहीं है। भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह नया मार्ग बनाया गया है। हालांकि, जब मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या 10 हजार से कम होती है, तभी प्राचीन गुफा का द्वार खोला जाता है और भक्त पुराने प्राकृतिक मार्ग से माता के दरबार तक पहुंचते हैं। यह अवसर बहुत कम श्रद्धालुओं को ही मिल पाता है।

 

प्राचीन गुफा का महत्व इसलिए भी अधिक माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि इसी गुफा में भैरवनाथ का शरीर मौजूद है। मान्यता है कि यहीं मां वैष्णो देवी ने भैरव का अपने त्रिशूल से वध किया था जिससे उसका सिर तो उड़कर एक घाटी में जा गिरा, जबकि उसका शरीर इस गुफा में ही रह गया। उस घाटी को अब भैरव घाटी के नाम से जाना जाता है। गुफा के भीतर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक है। भक्तों का मानना है कि यहां पहुंचते ही मन को विशेष शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। यही वजह है कि मकर संक्रांति से गुफा खुलते ही कटरा में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। जो भी श्रद्धालु इस अवधि में वैष्णो देवी धाम पहुंच रहे हैं, उनके लिए यह अवसर आध्यात्मिक शांति और मां की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम बन रहा है।

 

: - वर्तिका श्रीवास्तव

 

 

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वैष्णो देवी धाम का प्राचीन गुफा मार्ग खुला, 40 दिन होंगे दिव्य दर्शन

 

जम्मू के कटरा स्थित मां वैष्णो देवी धाम से श्रद्धालुओं के लिए एक शुभ समाचार सामने आया है। मकर संक्रांति के दिन से मां वैष्णो देवी का प्राचीन गुफा मार्ग श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के खुलने से भक्त एक बार फिर ऐतिहासिक गुफा के रास्ते गर्भगृह तक पहुंचकर मां की पवित्र पिंडियों के दर्शन कर पा रहे हैं।

 

यह प्राचीन गुफा मार्ग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस गुफा में मां भगवती का दिव्यवास है और यहां दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि भक्त सालभर इस पावन मार्ग के खुलने का इंतजार करते हैं। यह गुफा हर वर्ष केवल एक बार खोली जाती है और इस बार यह लगभग 40 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए खुली रहेगी।

 

मंदिर प्रशासन और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा यह निर्णय मकर संक्रांति से पहले लिया गया था, ताकि त्योहार और आगे आने वाले व्यस्त दिनों में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्राचीन मार्ग के खुलने से न केवल भीड़ प्रबंधन में मदद मिल रही है, बल्कि भक्तों को पारंपरिक और पूजनीय मार्ग से दर्शन का अवसर भी मिल रहा है।

 

श्रद्धालुओं के लिए यह गुफा प्रतिदिन दो समय खोली जा रही है। सुबह लगभग एक घंटे के लिए और रात में 10 बजे के आसपास एक घंटे के लिए । सीमित समय और संख्या के कारण श्रद्धालुओं को निर्धारित नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। श्राइन बोर्ड की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

 

प्राचीन गुफा मार्ग का दिव्य महत्व

 

माता वैष्णो देवी का पावन मंदिर कटड़ा से लगभग 14 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई के बाद आता है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कई ऐसे दिव्य स्थल मिलते हैं जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। इनमें बाणगंगा, अर्द्धकुंवारी और सांझी छत प्रमुख हैं। अर्द्धकुंवारी गुफा का महत्व माता के मुख्य भवन के समान ही माना जाता है। मान्यता है कि मां वैष्णो देवी ने इसी गुफा में कन्या रूप में लगभग 9 महीनों तक तपस्या की थी। इसी कारण इस गुफा को ‘गर्भजून’ भी कहा जाता है। यह स्थान भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र है।

 

वहीं माता रानी के मुख्य भवन में माता वैष्णो देवी पिंडियों के रूप में विराजमान हैं और यहां उनके देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी तथा देवी काली के स्वरूप में दर्शन होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर मां वैष्णो देवी ने भैरवनाथ का वध किया था। वर्तमान समय में श्रद्धालु जिस मार्ग से माता के दर्शन करते हैं, वह गुफा में प्रवेश का प्राकृतिक मार्ग नहीं है। भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह नया मार्ग बनाया गया है। हालांकि, जब मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या 10 हजार से कम होती है, तभी प्राचीन गुफा का द्वार खोला जाता है और भक्त पुराने प्राकृतिक मार्ग से माता के दरबार तक पहुंचते हैं। यह अवसर बहुत कम श्रद्धालुओं को ही मिल पाता है।

 

प्राचीन गुफा का महत्व इसलिए भी अधिक माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि इसी गुफा में भैरवनाथ का शरीर मौजूद है। मान्यता है कि यहीं मां वैष्णो देवी ने भैरव का अपने त्रिशूल से वध किया था जिससे उसका सिर तो उड़कर एक घाटी में जा गिरा, जबकि उसका शरीर इस गुफा में ही रह गया। उस घाटी को अब भैरव घाटी के नाम से जाना जाता है। गुफा के भीतर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक है। भक्तों का मानना है कि यहां पहुंचते ही मन को विशेष शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। यही वजह है कि मकर संक्रांति से गुफा खुलते ही कटरा में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। जो भी श्रद्धालु इस अवधि में वैष्णो देवी धाम पहुंच रहे हैं, उनके लिए यह अवसर आध्यात्मिक शांति और मां की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम बन रहा है।

 

: - वर्तिका श्रीवास्तव