वृंदावन : बांके बिहारी मंदिर में ‘फूल बंगला उत्सव’
ब्रज मंडल के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी जी के आंगन में शीतलता और सुंगध का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। हिंदू नववर्ष 2083 की पहली एकादशी यानी ‘कामदा एकादशी’ (29 मार्च) के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में भव्य ‘फूल बंगला’ महोत्सव का विधि-विधान से शुभारंभ हो गया है। भीषण गर्मी के प्रकोप से ठाकुर जी को बचाने और उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए भक्तों की ओर से यह विशेष आयोजन किया जाता है। यह दिव्य आयोजन अगले चार महीनों तक यानी लगभग 137 दिनों तक अनवरत जारी रहेगा। इन दिनों मंदिर परिसर में फूलों की ऐसी छटा बिखरी है कि भक्त दर्शन कर भाव-विभोर हो रहे हैं।
देश-विदेश के फूलों से महका परिसर
ठाकुर जी के इस विशेष बंगले को तैयार करने के लिए केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दिल्ली, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से विशेष फूल मंगवाए जा रहे हैं। मोगरा, गेंदा, मोतिया, गुलाब, रायबेल, रजनीगंधा, जूही, चंपा, केतकी और कमल जैसे अन्य सुगंधित फूलों का उपयोग किया जा रहा है। इन फूलों की प्राकृतिक खुशबू न केवल मंदिर के वातावरण को अलौकिक बना रही हैं, बल्कि भीषण गर्मी में मंदिर के भीतर तापमान को कम रखने में मदद कर रही है।
25 कारीगरों की कड़ी मेहनत
इस भव्य दरबार को सजाने के लिए करीब 1000 किलो (10 क्विंटल) ताजे फूलों का उपयोग किया गया है। लगभग 25 कुशल कारीगरों की टीम ने एक साथ मिलकर करीब 8 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद इस अलौकिक बंगले को अंतिम रूप दिया है। इसमें फूलों की बुनाई और उनके चयन में विशेष सावधानी बरती जाती है ताकि ठाकुर जी की प्रतिमा के चारों ओर एक शीतल घेरा बना रहे।
चैत्र एकादशी से हरियाली अमावस्या तक
शास्त्रों और ब्रज की परंपरा के अनुसार, ऋतु परिवर्तन के साथ ही ठाकुर जी की सेवा पद्धति में भी बदलाव आ जाता है। यह फूल बंगला महोत्सव, चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी से शुरू होकर श्रावण कृष्ण पक्ष की हरियाली अमावस्या तक चलेगा। मान्यता है कि फूलों की प्राकृतिक ठंडक से ठाकुर जी को अपार सुख मिलता है। प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों और विभिन्न प्रकार के फूल बंगलों में विराजमान होकर ठाकुर जी अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
10 गुना बढ़े ‘फूल बंगले’ के दाम
इस बार का फूल बंगला उत्सव कुछ ज्यादा ही चर्चाओं में है, क्योंकि इसके जरिए बांके बिहारी मंदिर कमेटी अपना खजाना भी भरने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी की ओर से जारी एक नए आदेश की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है, जिसमें फूल बंगला तैयार करवाने के लिए 10 गुना तक बढ़ी हुई राशि कार्यालय में जमा करनी होगी। पहले 15 हजार रुपये कार्यालय में जमा करने होते थे, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 1 लाख 51 हजार रुपये कर दिया गया है।
एक महीने से अधिक चलेगा उत्सव
इस साल हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना (अधिक मास) होने के कारण फूल बंगला उत्सव अधिक समय तक चलेगा। 29 मार्च 2026 से शुरू हुआ 137 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव 12 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है क्योंकि फूलबंगले में विराजे ठाकुर जी का स्वरूप इतना मनमोहक और आकर्षक है कि भक्त भावविभोर हो जाते हैं ।
वृंदावन : बांके बिहारी मंदिर में ‘फूल बंगला उत्सव’
ब्रज मंडल के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी जी के आंगन में शीतलता और सुंगध का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। हिंदू नववर्ष 2083 की पहली एकादशी यानी ‘कामदा एकादशी’ (29 मार्च) के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में भव्य ‘फूल बंगला’ महोत्सव का विधि-विधान से शुभारंभ हो गया है। भीषण गर्मी के प्रकोप से ठाकुर जी को बचाने और उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए भक्तों की ओर से यह विशेष आयोजन किया जाता है। यह दिव्य आयोजन अगले चार महीनों तक यानी लगभग 137 दिनों तक अनवरत जारी रहेगा। इन दिनों मंदिर परिसर में फूलों की ऐसी छटा बिखरी है कि भक्त दर्शन कर भाव-विभोर हो रहे हैं।
देश-विदेश के फूलों से महका परिसर
ठाकुर जी के इस विशेष बंगले को तैयार करने के लिए केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दिल्ली, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से विशेष फूल मंगवाए जा रहे हैं। मोगरा, गेंदा, मोतिया, गुलाब, रायबेल, रजनीगंधा, जूही, चंपा, केतकी और कमल जैसे अन्य सुगंधित फूलों का उपयोग किया जा रहा है। इन फूलों की प्राकृतिक खुशबू न केवल मंदिर के वातावरण को अलौकिक बना रही हैं, बल्कि भीषण गर्मी में मंदिर के भीतर तापमान को कम रखने में मदद कर रही है।
25 कारीगरों की कड़ी मेहनत
इस भव्य दरबार को सजाने के लिए करीब 1000 किलो (10 क्विंटल) ताजे फूलों का उपयोग किया गया है। लगभग 25 कुशल कारीगरों की टीम ने एक साथ मिलकर करीब 8 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद इस अलौकिक बंगले को अंतिम रूप दिया है। इसमें फूलों की बुनाई और उनके चयन में विशेष सावधानी बरती जाती है ताकि ठाकुर जी की प्रतिमा के चारों ओर एक शीतल घेरा बना रहे।
चैत्र एकादशी से हरियाली अमावस्या तक
शास्त्रों और ब्रज की परंपरा के अनुसार, ऋतु परिवर्तन के साथ ही ठाकुर जी की सेवा पद्धति में भी बदलाव आ जाता है। यह फूल बंगला महोत्सव, चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी से शुरू होकर श्रावण कृष्ण पक्ष की हरियाली अमावस्या तक चलेगा। मान्यता है कि फूलों की प्राकृतिक ठंडक से ठाकुर जी को अपार सुख मिलता है। प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों और विभिन्न प्रकार के फूल बंगलों में विराजमान होकर ठाकुर जी अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
10 गुना बढ़े ‘फूल बंगले’ के दाम
इस बार का फूल बंगला उत्सव कुछ ज्यादा ही चर्चाओं में है, क्योंकि इसके जरिए बांके बिहारी मंदिर कमेटी अपना खजाना भी भरने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी की ओर से जारी एक नए आदेश की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है, जिसमें फूल बंगला तैयार करवाने के लिए 10 गुना तक बढ़ी हुई राशि कार्यालय में जमा करनी होगी। पहले 15 हजार रुपये कार्यालय में जमा करने होते थे, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 1 लाख 51 हजार रुपये कर दिया गया है।
एक महीने से अधिक चलेगा उत्सव
इस साल हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना (अधिक मास) होने के कारण फूल बंगला उत्सव अधिक समय तक चलेगा। 29 मार्च 2026 से शुरू हुआ 137 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव 12 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है क्योंकि फूलबंगले में विराजे ठाकुर जी का स्वरूप इतना मनमोहक और आकर्षक है कि भक्त भावविभोर हो जाते हैं ।