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क्या है राहु ग्रह का सबसे बड़ा रहस्य ?

 

राहु एक ऐसे छाया ग्रह हैं, जिनका कोई भौतिक शरीर नहीं, बल्कि केवल सिर है। फिर भी उनका प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि वह राजा को रंक और रंक को राजा बना सकते हैं।


दरअसल, समुद्र मंथन के बाद जब देवताओं और असुरों में अमृत बांटा जा रहा था, तब स्वर्भानु नाम के एक असुर ने देवताओं का रूप धारण कर अमृतपान कर लिया । ये पता चलते ही विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत पीने के कारण सिर अमर हो गया और राहु कहलाया, जबकि उसका धड़ केतु बन गया।


नवग्रहों में राहु को भ्रम, माया और अचानक होने वाले बदलावों का कारक माना जाता है। कुंडली में राहु की अच्छी स्थिति से बड़ा पद, प्रसिद्धि और अचानक सफलता मिल सकती है। लेकिन अशुभ स्थिति में होने पर भ्रम, मानसिक अशांति और गलत निर्णयों का कारण भी बन सकता है।


छाया ग्रह होने के कारण राहु किसी राशि के स्वामी नहीं हैं। पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार, राहु का वाहन सिंह (शेर) है और उनका स्वरूप धुएँ के समान गहरे नीले-काले रंग का है। राहु का रत्न गोमेद है, जो मानसिक स्पष्टता, आत्मविश्वास और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा का प्रतीक है। और हाँ, तमिलनाडु के तिरुनागेश्वरम में स्थित श्री नागनाथस्वामी मंदिर, जिसे राहु स्थलम कहा जाता है, राहु का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि यहाँ पूजा और अभिषेक कराने से राहु दोष शांत होते हैं और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। इस मंदिर की एक अनोखी विशेषता यह भी है कि अभिषेक के समय शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध का रंग कुछ समय के लिए नीला दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे राहु दोष या कालसर्प दोष से मुक्ति का शुभ संकेत मानते हैं।

 

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क्या है राहु ग्रह का सबसे बड़ा रहस्य ?

 

राहु एक ऐसे छाया ग्रह हैं, जिनका कोई भौतिक शरीर नहीं, बल्कि केवल सिर है। फिर भी उनका प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि वह राजा को रंक और रंक को राजा बना सकते हैं।


दरअसल, समुद्र मंथन के बाद जब देवताओं और असुरों में अमृत बांटा जा रहा था, तब स्वर्भानु नाम के एक असुर ने देवताओं का रूप धारण कर अमृतपान कर लिया । ये पता चलते ही विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत पीने के कारण सिर अमर हो गया और राहु कहलाया, जबकि उसका धड़ केतु बन गया।


नवग्रहों में राहु को भ्रम, माया और अचानक होने वाले बदलावों का कारक माना जाता है। कुंडली में राहु की अच्छी स्थिति से बड़ा पद, प्रसिद्धि और अचानक सफलता मिल सकती है। लेकिन अशुभ स्थिति में होने पर भ्रम, मानसिक अशांति और गलत निर्णयों का कारण भी बन सकता है।


छाया ग्रह होने के कारण राहु किसी राशि के स्वामी नहीं हैं। पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार, राहु का वाहन सिंह (शेर) है और उनका स्वरूप धुएँ के समान गहरे नीले-काले रंग का है। राहु का रत्न गोमेद है, जो मानसिक स्पष्टता, आत्मविश्वास और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा का प्रतीक है। और हाँ, तमिलनाडु के तिरुनागेश्वरम में स्थित श्री नागनाथस्वामी मंदिर, जिसे राहु स्थलम कहा जाता है, राहु का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि यहाँ पूजा और अभिषेक कराने से राहु दोष शांत होते हैं और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। इस मंदिर की एक अनोखी विशेषता यह भी है कि अभिषेक के समय शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध का रंग कुछ समय के लिए नीला दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे राहु दोष या कालसर्प दोष से मुक्ति का शुभ संकेत मानते हैं।