सूर्य पुत्र शनि देव को नवग्रहों में न्याय, कर्म, अनुशासन, धैर्य, संघर्ष और कर्मफल का कारक माना जाता है। शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप श्याम वर्ण का है। वे गहरे नीले या काले वस्त्र धारण करते हैं और कौवे पर विराजमान रहते हैं। शनि देव का रत्न नीलम यानी Blue Sapphire है, जो साहस, धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
शनिवार के दिन शनि देव का पूजन किया जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व है क्योंकि हनुमान जी ने रावण की कैद से शनि को छुड़ाया था। मान्यता है कि हनुमान जी के प्रति श्रद्धा रखने वालों पर शनि देव अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। इसलिए शनिवार को हनुमान जी और शनि देव की आराधना करने का विशेष महत्व माना गया है।
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर में स्थित शनि देव मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ शनि देव स्वयंभू शिला के रूप में विराजमान हैं। क्या आप जानते हैं कि बरसों तक इस गाँव के अधिकांश घरों में दरवाज़े और ताले नहीं लगाए जाते थे, क्योंकि लोगों का विश्वास था कि स्वयं शनि देव पूरे गाँव की रक्षा करते हैं और यहाँ चोरी या अन्याय करने वाला उनके दण्ड से बच नहीं पाता।
सूर्य पुत्र शनि देव को नवग्रहों में न्याय, कर्म, अनुशासन, धैर्य, संघर्ष और कर्मफल का कारक माना जाता है। शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। उनका स्वरूप श्याम वर्ण का है। वे गहरे नीले या काले वस्त्र धारण करते हैं और कौवे पर विराजमान रहते हैं। शनि देव का रत्न नीलम यानी Blue Sapphire है, जो साहस, धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
शनिवार के दिन शनि देव का पूजन किया जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व है क्योंकि हनुमान जी ने रावण की कैद से शनि को छुड़ाया था। मान्यता है कि हनुमान जी के प्रति श्रद्धा रखने वालों पर शनि देव अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। इसलिए शनिवार को हनुमान जी और शनि देव की आराधना करने का विशेष महत्व माना गया है।
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर में स्थित शनि देव मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ शनि देव स्वयंभू शिला के रूप में विराजमान हैं। क्या आप जानते हैं कि बरसों तक इस गाँव के अधिकांश घरों में दरवाज़े और ताले नहीं लगाए जाते थे, क्योंकि लोगों का विश्वास था कि स्वयं शनि देव पूरे गाँव की रक्षा करते हैं और यहाँ चोरी या अन्याय करने वाला उनके दण्ड से बच नहीं पाता।