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देश की सबसे पावन तीर्थयात्राओं में शामिल श्री अमरनाथ यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित होने जा रही है। 3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार पारंपरिक पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों को लगभग 12 फीट तक चौड़ा किया गया है, जिससे यात्रियों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक आसान होगी। साथ ही यात्रा मार्गों पर क्रैश बैरियर, हैंड रेलिंग, चिकित्सा सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
कहां स्थित है अमरनाथ गुफा?
श्री अमरनाथ गुफा जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर से लगभग 135 किलोमीटर दूर समुद्र तल से करीब 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। लगभग 19 मीटर गहरी, 16 मीटर चौड़ी और 11 मीटर ऊंची यह गुफा हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। यही कारण है कि अमरनाथ को "तीर्थों का तीर्थ" भी कहा जाता है।
अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण कैसे करें?
एक दुर्गम यात्रा होने की वजह से अमरनाथ यात्रा के लिए पहले पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। श्रद्धालु अधिकृत बैंकों के माध्यम से ऑफलाइन या श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, पासपोर्ट आकार का फोटो और RFID कार्ड आवश्यक हैं। ऑनलाइन आवेदन के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट और फोटो अपलोड कर शुल्क जमा करना होता है, जिसके बाद यात्रा परमिट डाउनलोड किया जा सकता है।
आइए अमरनाथ यात्रा के दो प्रमुख और पारंपरिक मार्गों के बारे में जानते हैं । पहलगाम मार्ग - यह अमरनाथ यात्रा का पारंपरिक और सबसे लोकप्रिय मार्ग है। इसकी दूरी लगभग 36 से 48 किलोमीटर मानी जाती है और यात्रा पूरी करने में सामान्यतः 3 से 4 दिन लगते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतों, झीलों और धार्मिक स्थलों से होकर गुजरने के कारण अधिकांश श्रद्धालु इसी मार्ग को चुनते हैं।
बालटाल मार्ग - यहां अमरनाथ गुफा की दूरी लगभग 14 किलोमीटर है। यह मार्ग छोटा तो है, लेकिन काफी खड़ी चढ़ाई वाला माना जाता है। शारीरिक रूप से सक्षम श्रद्धालु अक्सर इसी रास्ते से यात्रा करते हैं और कई यात्री एक ही दिन में दर्शन कर वापस लौट आते हैं।
अमरनाथ गुफा की अद्भुत विशेषता
अमरनाथ गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यहां बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग है। गुफा की छत से टपकने वाली जल बूंदें जमकर स्वयंभू हिम शिवलिंग का रूप लेती हैं। मान्यता है कि चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ इसका आकार भी बदलता रहता है और श्रावण पूर्णिमा के समय यह अपने पूर्ण स्वरूप में दिखाई देता है। मुख्य शिवलिंग के अलावा गुफा में माता पार्वती, भगवान गणेश और भैरवनाथ के हिम स्वरूप भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होते हैं।
क्या है अमरनाथ की पौराणिक कथा?
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए एक ऐसे स्थान की तलाश में थे, जहां कोई अन्य जीव मौजूद न हो। यात्रा के दौरान उन्होंने अपने वाहन नंदी को इस मार्ग में किसी अन्य जीव को आगे न जाने देने के लिए एक स्थान पर छोड़ दिया, जो उस समय बैलग्राम के नाम से जाना गया और आज पहलगाम कहलाता है। इसके बाद उन्होंने चंद्रमा को जिस स्थान पर छोड़ा वह चंदनवाड़ी, शेषनाग को जहां छोड़ा वह शेषनाग झील, पंच तत्वों को पंचतरणी तथा अपने पुत्र गणेश को जिस स्थान पर विराजमान किया वह गणेश टॉप के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

