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आज है संकष्टी चतुर्थी का व्रत

संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज यानी 5 सितंबर को है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन गणपति की विधि-विधान से पूजा और उपवास रखने से समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं और भक्त को मनचाहे  वरदान की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत के दौरान कथा को जरूर पढ़ना या सुनना चाहिए। कहते हैं कि व्रत कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

संकष्टी व्रत कथा-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवता कई विपदाओं से घिरे थे। परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए वह सभी भगवान शंकर के पास गए। उस समय शंकर जी के साथ उनके बेटे कार्तिकेय और श्रीगणेश भी थे। देवताओं ने महादेव को अपनी समस्या सुनाई। जिसके बाद भगवान शंकर ने कार्किकेय और गणेश जी से सलाह ली। शंकर जी ने अपने बेटों से कहा कि कौन इस समस्या को हल करेगा। जिस पर कार्तिकेय और गणेश जी को दोनों ही सक्षम लगे। दोनों ने ही कहा कि वह उस काम को कर लेंगे।

लेकिन भगवान शंकर ने अपने बेटों की परीक्षा लेने का फैसला किया। शंकर जी ने कहा कि जो इस धरती की सबसे पहले परिक्रमा करके वापस आएगा। वह देवताओं की मदद करेगा। शंकर जी की बात सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर धरती की ओर चल पड़े। गणेश जी का वाहन चूहा था। अगर वह धरती की परिक्रमा के लिए जाते तो उन्हें बहुत समय लगता। ऐसे में गणेश जी ने अपने माता-पिता की ही 7 बार परिक्रमा कर ली।
जब कार्तिकेय धरती की परिक्रमा करके वापस लौटे तो खुद को विजेता बताने लगे। तब शंकर जी ने गणेश जी से पूछा कि आखिर वह धरती की परिक्रमा के लिए क्यों नहीं गए। तब गणेश जी ने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त संसार है। तब शिवजी ने देवताओं की मदद के लिए गणेश जी आशीर्वाद देकर भेजा।