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नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि को दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली और अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है। उनका स्वरूप भले ही महाभयंकर दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं। इसी वजह से मां कालरात्रि को शुभ फल देने वाली देवी भी कहा जाता है।
क्या है मां कालरात्रि की कथा ?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब क्रूर अत्याचारी शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे, तब देवी दुर्गा ने दुष्ट शक्तियों का अंत करने के लिए अपना उग्र स्वरूप धारण किया। मां का यह भयंकर रूप कालरात्रि कहलाया। विशेष रूप से रक्तबीज के साथ युद्ध में मां ने उसके रक्त को खप्पर में पी कर उसके रक्त से उत्पन्न होने वाले राक्षसों का अंत किया। मां कालरात्रि की कथा हमें सिखाती है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की ही जीत होती है।
कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप ?
मां कालरात्रि का रंग अंधकार के समान काला है और उनके बाल खुले हुए हैं। उनके गले में नरमुंडों की माला और विद्युत के समान चमकने वाली माला सुशोभित है। उनकी तीन आंखें हैं जो ब्रह्माण्ड के समान गोल नेत्र हैं। ये गधे पर सवार रहती हैं। इनकी चार भुजाओं में से दो हाथों में लोहे के अस्त्र-शस्त्र हैं, जबकि अन्य दो हाथ भक्तों को अभय और वरदान देते हैं। उनका स्वरूप दुष्टों के लिए भय उत्पन्न करने वाला, लेकिन भक्तों के लिए कल्याणकारी है।

