Sanskar

कैसे पुरुष से स्त्री और फिर कई पुत्रों की मां बने नारद ?

किसी पुरुष का स्त्री बनकर बच्चे को जन्म देना, प्रकृति के नियम के विपरीत है। लेकिन पुराणों में कई ऐसी कहानियां हैं जिन्हें आज की वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यकीन करना किसी के लिए भी मुश्किल है। ऐसी ही एक अद्भुत और अजब-गजब कहानी है देवी भाग्वत पुराण में। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के छठे स्कंध में इस कथा का वर्णन मिलता है। एक पुरुष ने स्त्री बनकर कई बच्चों को जन्म दिया। यह पुरुष कौन हैं और वह कैसे पुरुष से स्त्री बने, आइये जानते हैं इस रोचक कथा के बारे में।

 

देवी लक्ष्मी के व्यवहार से नारद हुए हैरान

 

एक बार देवऋषि नारद बैकुंठ पहुंचे और नारायण संग बैठी लक्ष्मी को प्रणाम किया ही था कि लक्ष्मी जी अचानक भवन के अंदर चली गईं। इससे नारद मुनि को बड़ी हैरानी हुई। अभिमानवश अपने आप को श्रेष्ठ बताते हुए नारद मुनि ने भगवान विष्णु से कहा कि मैं तो महातपस्वी, मोहमाया और काम भावना से मुक्त हूं फिर देवी लक्ष्मी मुझे देखकर भवन में क्यों चली गईं। नारद मुनि की बात सुन मायापति मुस्कुराने लगे, भले किसी के मन के भाव भगवान से कहां छुपता हैं । नारद मुनि की बातों में अहंकार की भावना को समझकर भगवान विष्णु ने अपनी एक लीला दिखाई।

 

नारद मुनि बने स्त्री

 

भगवान विष्णु नारदमुनि को लेकर कान्यकुब्ज नगर, जिसे वर्तमान में कन्नौज कहा जाता है, वहां आए। भगवान ने नारदजी जी को एक सुंदर सा सरोवर दिखाकर कहा कि इसमें स्नान करके आओ, फिर मैं तुम्हें अपनी माया के दर्शन करवाता हूं। नारद जी ने सरवोर में जैसे ही डुबकी लगाई उनका शरीर स्त्री का हो गया और वह भूल गए कि वह कौन हैं। इस बीच भगवान विष्णु नारद जी का तंबूरा लेकर बैकुंठ चले आए।

 

ब्रह्मचारी नारद मुनि बने बच्चों की मां

 

नारद जी सरोवर से निकलकर इधर-उधर भटक रहे थे कि तभी तालध्वज नाम के एक राजा उधर आए। स्त्री बने नारद की सुंदरता पर मोहित होकर तालध्वज ने उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया। स्त्री रूप में नारद मुनि ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और दोनों का विवाह हो गया। समय के साथ स्त्री बने नारद और राजा तालध्वज के कई पुत्र हुए। दोनों ने अपने पुत्रों का लालन-पालन बड़े लाड़-प्यार से किया और सभी पुत्र बड़े गए। 

 

नारद मुनि का मोह हुआ भंग

 

समय बीतता गया और एक दिन किसी अन्य राज्य के राजा ने युद्ध का बिगुल बजा दिया और  कई दिनों तक भयंकर संग्राम हुआ। देखते ही देखते उस युद्ध में राजा तालध्वज के सभी पुत्र मारे गए । इससे अत्यंत दु:खी होकर स्त्री रूप में नारद जी विलाप करने लगे। उन्हें विचलित और विलाप अवस्था में भगवान नारायण से देखा नहीं गया । विष्णु जी एक वृद्ध व्यक्ति के रूप में वहां प्रकट हुए और नारद मुनि से कहा कि आप सरोवर में स्नान कीजिए और पुत्रों की आत्मा की शांति करवाइए। नारद मुनि ने सरोवर में जैसे ही डुबकी लगाई अपने वास्तविक स्वरूप में लौट आए। उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उनका अहंकार दूर हो गया।

 

नारद मुनि की क्षमा याचना

 

अब देवऋषि नारद को प्रभु की माया का भान हो चुका था। अपने स्त्री रूप में किया सभी कर्म याद कर ब्रह्मचारी नारद मुनि अपने ऊपर लज्जित होने लगे। चतुर्भुज रूप धारण कर भगवान विष्णु सामने खड़े हैं और देवर्षि नारद भगवान के चरणों में बार-बार मस्तक झुका कर क्षमा प्रार्थना करते हैं। कई प्रकार से हरि चरणों की स्तुति करते हैं। ऐसे में करुणा निधान भगवान नारायण नारद मुनि को वरदान देते हैं कि “हे नारद अब से तुम मेरे प्रिय भक्त होगे और तुम्हारे मन में छल कपट का वास अब से कभी नहीं होगा।“

 

:- रमन शर्मा

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कैसे पुरुष से स्त्री और फिर कई पुत्रों की मां बने नारद ?

किसी पुरुष का स्त्री बनकर बच्चे को जन्म देना, प्रकृति के नियम के विपरीत है। लेकिन पुराणों में कई ऐसी कहानियां हैं जिन्हें आज की वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यकीन करना किसी के लिए भी मुश्किल है। ऐसी ही एक अद्भुत और अजब-गजब कहानी है देवी भाग्वत पुराण में। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के छठे स्कंध में इस कथा का वर्णन मिलता है। एक पुरुष ने स्त्री बनकर कई बच्चों को जन्म दिया। यह पुरुष कौन हैं और वह कैसे पुरुष से स्त्री बने, आइये जानते हैं इस रोचक कथा के बारे में।

 

देवी लक्ष्मी के व्यवहार से नारद हुए हैरान

 

एक बार देवऋषि नारद बैकुंठ पहुंचे और नारायण संग बैठी लक्ष्मी को प्रणाम किया ही था कि लक्ष्मी जी अचानक भवन के अंदर चली गईं। इससे नारद मुनि को बड़ी हैरानी हुई। अभिमानवश अपने आप को श्रेष्ठ बताते हुए नारद मुनि ने भगवान विष्णु से कहा कि मैं तो महातपस्वी, मोहमाया और काम भावना से मुक्त हूं फिर देवी लक्ष्मी मुझे देखकर भवन में क्यों चली गईं। नारद मुनि की बात सुन मायापति मुस्कुराने लगे, भले किसी के मन के भाव भगवान से कहां छुपता हैं । नारद मुनि की बातों में अहंकार की भावना को समझकर भगवान विष्णु ने अपनी एक लीला दिखाई।

 

नारद मुनि बने स्त्री

 

भगवान विष्णु नारदमुनि को लेकर कान्यकुब्ज नगर, जिसे वर्तमान में कन्नौज कहा जाता है, वहां आए। भगवान ने नारदजी जी को एक सुंदर सा सरोवर दिखाकर कहा कि इसमें स्नान करके आओ, फिर मैं तुम्हें अपनी माया के दर्शन करवाता हूं। नारद जी ने सरवोर में जैसे ही डुबकी लगाई उनका शरीर स्त्री का हो गया और वह भूल गए कि वह कौन हैं। इस बीच भगवान विष्णु नारद जी का तंबूरा लेकर बैकुंठ चले आए।

 

ब्रह्मचारी नारद मुनि बने बच्चों की मां

 

नारद जी सरोवर से निकलकर इधर-उधर भटक रहे थे कि तभी तालध्वज नाम के एक राजा उधर आए। स्त्री बने नारद की सुंदरता पर मोहित होकर तालध्वज ने उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया। स्त्री रूप में नारद मुनि ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और दोनों का विवाह हो गया। समय के साथ स्त्री बने नारद और राजा तालध्वज के कई पुत्र हुए। दोनों ने अपने पुत्रों का लालन-पालन बड़े लाड़-प्यार से किया और सभी पुत्र बड़े गए। 

 

नारद मुनि का मोह हुआ भंग

 

समय बीतता गया और एक दिन किसी अन्य राज्य के राजा ने युद्ध का बिगुल बजा दिया और  कई दिनों तक भयंकर संग्राम हुआ। देखते ही देखते उस युद्ध में राजा तालध्वज के सभी पुत्र मारे गए । इससे अत्यंत दु:खी होकर स्त्री रूप में नारद जी विलाप करने लगे। उन्हें विचलित और विलाप अवस्था में भगवान नारायण से देखा नहीं गया । विष्णु जी एक वृद्ध व्यक्ति के रूप में वहां प्रकट हुए और नारद मुनि से कहा कि आप सरोवर में स्नान कीजिए और पुत्रों की आत्मा की शांति करवाइए। नारद मुनि ने सरोवर में जैसे ही डुबकी लगाई अपने वास्तविक स्वरूप में लौट आए। उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उनका अहंकार दूर हो गया।

 

नारद मुनि की क्षमा याचना

 

अब देवऋषि नारद को प्रभु की माया का भान हो चुका था। अपने स्त्री रूप में किया सभी कर्म याद कर ब्रह्मचारी नारद मुनि अपने ऊपर लज्जित होने लगे। चतुर्भुज रूप धारण कर भगवान विष्णु सामने खड़े हैं और देवर्षि नारद भगवान के चरणों में बार-बार मस्तक झुका कर क्षमा प्रार्थना करते हैं। कई प्रकार से हरि चरणों की स्तुति करते हैं। ऐसे में करुणा निधान भगवान नारायण नारद मुनि को वरदान देते हैं कि “हे नारद अब से तुम मेरे प्रिय भक्त होगे और तुम्हारे मन में छल कपट का वास अब से कभी नहीं होगा।“

 

:- रमन शर्मा