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हिंदू धर्म में भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ और तपस्या करना नहीं, बल्कि सच्चे मन से भगवान के प्रति समर्पित होना भी है। लपसी-तपसी की लोकप्रचलित कथा इसी बात को समझाती है। इसमें देवर्षि नारद मुनि दो ऐसे भक्तों की परीक्षा लेते हैं, जिनकी भक्ति का तरीका अलग-अलग है। इस परीक्षा से स्पष्ट होता है कि भगवान के प्रति श्रद्धा में बाहरी साधना से अधिक महत्व मन के भाव और आचरण का होता है।
क्या है कथा ?

