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जोधपुर में आकार ले रहा एक अनूठा ‘अक्षरधाम मंदिर’

भारत की सनातन संस्कृति में मंदिरों का विशेष स्थान है और इसी वजह से भारत पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है । भारत मंदिरों का देश है और कई धार्मिक स्थान तो ऐसे हैं जहां एक ही जगह पर सैकड़ों मंदिर हैं । हर मंदिर का अपना इतिहास, महत्व और पहचान है।

आइये जानते हैं ऐसे ही एक भव्य मंदिर के बारें में जिसका निर्माण पिछले पांच साल से राजस्थान के जोधपुर में हो रहा है । जीहां, यहां बन रहे अक्षरधाम मंदिर के साथ ही जोधपुर शहर में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा । शहर के सूरसागर क्षेत्र के कालीबेरी में बन रहे इस मंदिर के साथ कई अनूठी कहानियां और रोचक किस्से जुड़े हैं। दावा किया जा रहा है कि अब तक बने अक्षरधाम मंदिरों में ये सबसे खास होगा।

लोहे का प्रयोग नहीं

खास इसलिए है क्योंकिमंदिर के मुख्य मंडप का निर्माण बिना कंक्रीट के पिलर के होगा । यह एक ऐसा मंदिर होगा जिसमें पिलर ग्लास और फाइबर के होंगे। अर्थात लोहे का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जा रहा है। मंदिर के मुख्य मंडप के अलावा जहां पिलर लगेंगेवो पत्थर के नहीं होंगे। पत्थरों की बजाय इन पिलर को जीएफआरजी टेक्नोलॉजी से तैयार किया जा रहा है यानी ये ग्लास, फाइबर और जिप्सम से तैयार होंगे। जिनकी समय सीमा करीब 150 साल होगी।

मंदिर को शानदार बनाने के लिए 3 हजार से ज्यादा पत्थरों की नक्काशी की जा रही है। मंदिर की इमारत 40 फीसदी तैयार हो चुकी है। लगभग एक हजार करोड़ की लागत से बन रहे मंदिर की ऊंचाई 125 फीट होगी। मंदिर की इमारत को हवादार बनाने के लिए मंदिर में जोधपुर की जालियां लगाई जा रही हैं।

केवल जोधपुरी पत्थर का इस्तेमाल

देशमें कई अक्षरधाम मंदिर हैं जिनमें बंशी पहाड़ और मकराना के मार्बल का उपयोग हुआ है लेकिन, यह पहला ऐसा मंदिर है जिसमें केवल जोधपुर का पत्थर ही काम में लिया जा रहा है।

सभा मंडप में बैठ सकेंगे 3 हजार दर्शनार्थी

मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सत्संग सुनने और प्रार्थना के लिए सभा मंडप होगा जिसमें 3 हजार लोग एक साथ बैठकर सत्संग सुन सकेंगे। इसको भी पिलर रहित बनाया गया है। मंडप को पीटी स्ट्रक्चर के तहत बनाया गया है। संतों के बैठने के लिए एक बड़ा स्टेज भी बनाया गया है। यहां पर 14 एसी और 12 बड़े पंखे भी लगाए जाएंगे।

नशा मुक्ति केंद्र का भी निर्माण

युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए मंदिर में एक व्यसन मुक्ति केंद्र भी तैयार किया जा रहा है जिसका मकसद समाज को नशा मुक्त बनाना होगा ।इसके तहत नशे के आदी युवाओं का नशा छुड़वाया जाएगा और उन्हें धर्म, सत्संग और अध्यात्म से जोड़ा जाएगा।

क्या हैं अक्षरधाम मंदिर ?

सर्वविदित है कि स्वामीनारायण जी के अनोखे सांस्कृतिक तीर्थ हैं अक्षरधाम मंदिर....वैसे तो भारतवर्ष में अक्षरधाम मंदिर गांधीनगर गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश में स्थित हैं। इनमें सबसे बड़ा मंदिर दिल्ली का है लेकिन अपनी विशेषता और भव्यता के मामले में जोधपुर का मंदिर निश्चित ही अपना अलग स्थान बना पाएगा।

स्वामीनारायण जी का जन्म 3 अप्रैल 1781 को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के छपैया में हुआ था और उन्हें सहजानंद स्वामी के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने एक योगी का जीवन जिया और अपने धर्म, अहिंसा और ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों के साथ हिंदू धर्म में नया  उत्साह लाये। उन्होंने अपने गुरु स्वामी रामानंद की शिक्षाओं पर स्वामीनारायण संप्रदाय की नींव रखी।

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