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अभी गुप्त नवरात्र चल रहे हैं और 26 जनवरी को अष्टमी तिथि है और सोमवार भी है, इसलिए इस दिन का खास महत्त्व है। सोमवार की अष्टमी का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन भगवान शिव (सोमवार के अधिष्ठाता) और अष्टमी तिथि ( शक्ति और भैरव बाबा से जुड़ी है) के मिलन का दिन होता है । इससे महादेव और मां दुर्गा की कृपा पाने, अटके काम पूरे करने और मनोकामना पूर्ति के लिए यह एक शुभ संयोग बन जाता है। इस अवसर पर शिवालय में कुछ विशेष वस्तुओं द्वारा पूजन करने से लाभ प्राप्त होता है, जैसे- बेलपत्र, चावल और मूंग की दाल के दाने।
सोमवार की अष्टमी का महत्व :
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कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली सोमवार की अष्टमी दोनों ही फलदायी होती हैं।
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इस विशेष दिन की पूजा किसी मंदिर में शिवालय में, सिद्ध पीठ में, ज्योतिर्लिंग में या तीर्थ आदि स्थान पर करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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संध्या काल में गौधूलि बेला पर प्रदोष काल में इस पर्व के पूजन का विधान बताया गया है।
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इस दिन माँ भगवती अपनी 64 योगनियों सहित महादेव के साथ उपस्थित होती हैं। इस कारण शिव-शक्ति की उपासना के लिए ये दिन उत्तम बताया गया है।
मान्यताएं :
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शिव पूजा का उत्तम दिन: सोमवार भगवान शिव को समर्पित है और अष्टमी तिथि भी माँ भगवती और शिव-आराधना के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है, इसलिए इस दिन शिव पूजा से कई गुना फल मिलता है।
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मनोकामना पूर्ति: सोमवार की अष्टमी पर किए गए उपायों (जैसे 31 चावल, 31 मूंग, 31 बेलपत्र अर्पित करना) से अटके काम पूरे होते हैं और मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।
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दुर्गा और भैरव पूजा: शुक्ल पक्ष की अष्टमी मासिक दुर्गाष्टमी कहलाती है, जो मां दुर्गा की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है। जबकि कृष्ण पक्ष की अष्टमी भगवान शिव के भैरव रूप के लिए खास है।
कैसे करें पूजन :
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शिव मंदिर जाकर 31 चावल, 31 हरे मूंग और 31 बेलपत्र (पीला-लाल चंदन) लगा कर चढ़ाएं।
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अशोक सुंदरी के स्थान पर बेलपत्र रखें और मनोकामना बोलें।
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नंदी के ऊँचे पांव के पास मूंग के दानों का ढेर रखें।
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लाल डंडी वाला धतूरे का फूल अर्पित करने से धन-संपदा की प्राप्ति होती है।
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शिवालय से पूजन करके लौटते समय दहलीज़ पर उल्टे (बायें) हाथ की तरफ 31 चावल रखें।

