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उत्तर भारत की प्रसिद्ध रामबरात निकालने को हुई तैयारी, क्या है आगरा में राम बरात का इतिहास?

आगरा: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को दूल्हे के रूप में देख देव सुंदरियां भी घरों की छतों से फूल बरसाकर गीत गा रही हैं,देवता नगाड़े बजा रहे हैं। घोड़े और हाथी गरज रहे हैं। बारात में बैंड-बाजे बज रहे हैं। पशु-पक्षी नर-नारी देव सब सिया को ब्याहने आ रहे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को निहार रहे हैं। उधर, जनकपुरी में रामबरात की अगवानी की तैयारी चल रही हैं। सतरंगी रोशनी से नहाए जनक महल की शोभा देखते ही बनती है।

रामबरात उत्तर भारत में मनाये जाने वाले प्रमुख पर्वों में से एक है। यह रामलीला नाटक का एक हिस्सा होता है जिसमें रामजी की बारात को पूरे शहरभर में काफी धूम-धाम के साथ निकाला जाता है। वैसे तो इसका आयोजन कई जगहों पर किया जाता है लेकिन इसका सबसे भव्य आयोजन "आगरा" में देखने को मिलता है, जहां पर आज से लगभग 125 वर्ष पूर्व में पहली बार इसका आयोजन किया गया था। 

रामबारात रामलीला मंचन का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें प्रभु श्रीराम और माता सीता के स्वयंवर को दिखाया जाता है। पहले समय में यह उत्सव लोगो के मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। कई जगहों पर इस पर्व को विवाह पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।

बता दे इस उत्सव में दूल्हे के रुप में प्रभु श्रीराम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघन और उनके गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र तथा अन्य बारातीगण भी शामिल होते हैं। रामबारात का उत्सव रामलीला नाटक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें प्रभु श्रीराम और माता सीता का विवाह होता है।

जानकारी के लिए बता दे, कि इस बार आगरा के दयालबाग इलाके को जनकपुरी के तौर पर सजाया गया है। जहां राम बारात का स्वागत किया जाएगा। बता दे पूरे इलाके को आकर्षक लाइटों के साथ सजाया गया है। दो दिन बाद बुधवार और गुरुवार को राम बारात निकासी का आयोजन होगा। बता दें कि दो साल से कोरोना के चलते राम बारात का आयोजन नहीं की जा रहा था।

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