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नवरात्र के अवसर पर आइये जानते हैं कि साधक के लिए दस महाविद्या की उपासना कितनी फलदायी है।

क्या है दस महाविद्या, क्या है पूजन का महात्म्य ?


मां दुर्गा को सुख...समृद्धि और धन की देवी माना जाता है... नवरात्रि के इन 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा की उपासना करते हैं अर्थात मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा। चैत्र नवरात्रि को बासंतिक नवरात्रि भी कहा जाता है क्योंकि यह पर्व बसंत ऋतु में होता है । इस दौरान माता की कृपा पाने के लिए भक्त पूजन एवं व्रत के साथ ही कई विशेष  अनुष्ठान करते हैं जिनमें मां सती की दस महाविद्याओं की पूजा भी करते हैं । कौन-कौन सी हैं दस महाविद्याएं, । उनकी पूजा का क्या महत्व है और किस विधि से करनी चाहिए ये पूजा... आइये जानते हैं ।  
दस महाविद्या का संबंध मां सती के 10 दिव्य स्वरूपों से है और इन 10 विद्याओं की साधना और उपासना से विशेष फल की प्राप्ति होती है। माता के प्रत्येक स्वरुप का नाम, गुण और मंत्र है। ये दस महाविद्याएं इस प्रकार है- 

श्री श्री १०८ कमलराज जी महाराज, माँ भुवनेश्वरी शक्तिपीठ भक्तियोग आश्रम, विंध्याचल धाम, मिर्जापुर के अनुसार- 
(तंत्र मार्ग से मां भगवती के उपासना करने वालो के लिए दस महाविद्या की साधना बहुत महत्वपूर्ण है, जो की मां काली, मां तारा, मां छिन्नमस्ता, मां षोडशी, मां भुवनेश्वरी, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला ये जो क्रम है ये जीव से ब्रह्म होने का क्रम है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में स्थित होने का क्रम है, जो काली के रुप में अनियंत्रित ऊर्जा है हम सब की  जो अनियंत्रित है उसको क्रमशः इनकी साधना करके स्वयं को नियंत्रित करते हुए मन बुद्धि शरीर को शोधित करते हुए जीव को ब्रह्म होने का जो प्रक्रिया है उसका ये मार्ग है, जो व्यक्ति को धर्म अर्थ काम मोक्ष को सहज भाव से प्राप्ति कराता है।)


मां महाकाली सभी 10 महाविद्याओं में मां काली को प्रथम रूप माना जाता है। माता दुर्गा ने राक्षसों का वध करने के लिए यही रूप धारण किया था और किसी प्रकार की सिद्धि प्राप्त करने के लिए माता के इस रूप की पूजा की जाती है। जो भी भक्त इनकी साधना करना चाहता है उसे एकनिष्ठ और पवित्र मन का होना चाहिए। 

मां तारा सर्वप्रथम महर्षि वशिष्ठ ने मां तारा की आराधना की थी। तंत्र-मंत्र में मां तारा का विशेष स्थान है । देवी के इस रूप की आराधना करने पर आर्थिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

मां छिन्नमस्ता इनका स्वरूप कटा हुए सिर और बहते हुए रक्त की तीन धाराओं से सुशोभित रहता है। इस महाविद्या की उपासना शांत मन से करने पर शांत स्वरूप और उग्र रूप में उपासना करने पर देवी के उग्र रूप के दर्शन होते है।

मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी) चार भुजा और तीन नेत्र वाली मां त्रिपुर सुंदरी को षोडशी, ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी, ललितागौरी, पद्माक्षी रेणुका तथा राजराजेश्वरी भी कहते हैं। माता 16 कलाओं से पूर्ण है इसलिए षोडशी भी कहा जाता है। 

मां भुवनेश्वरी पुत्र प्राप्ति के लिए माता भुवनेश्वरी की आराधना फलदायी मानी जाती है। यह शताक्षी और शाकम्भरी नाम से भी जानी जाती है। इस महाविद्या की आराधना से सूर्य के समान तेज ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन में मान-सम्मान बढ़ता है।

मां भैरवी माता भैरवी की उपासना से व्यक्ति सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है। इनकी पूजा से व्यापार में लगातार बढ़ोतरी होती है और धन सम्पदा की प्राप्ति होती है। 

मां धूमावती धूमावती माता को अभाव और संकट को दूर करने वाली माता कहते है। इनकी साधना से व्यक्ति की पहचान महाप्रतापी और सिद्ध पुरूष के रूप में होती है। ऋग्वेद में इन्हें 'सुतरा' कहा गया है।

मां बगलामुखी बगलामुखी की साधना शत्रु भय से मुक्ति और वाक् सिद्धि के लिए की जाती है। जो साधक नवरात्रि में इनकी साधना करते है वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं। माता का स्वरूप पीतांबरा अर्थात पीले वस्त्र, आभूषण और फूलों से सुसज्जित है। 

मां मातंगी जो भक्त अपने गृहस्थ जीवन को सुखमय और सफल बनाना चाहते हैं उन्हें मां मातंगी की आराधना करना चाहिए। जो भक्त मातंगी महाविद्या की सिद्धि प्राप्त करता है वह अपने खेल, कला और संगीत के कौशल से दुनिया को अपने वश में कर लेता है।

मां कमला मां कमला की साधना समृद्धि, धन, नारी और पुत्र की प्राप्ति के लिए की जाती है। इनकी साधना से व्यक्ति धनवान और विद्यावान हो जाता है।

दस के अंक का सनातन धर्म में अपना ही एक महत्व रहा है। दिशाओं की संख्या भी 10 है और दस महाविद्या की देवियों में से ही हर एक दिशा की अधिष्ठात्री देवी हैं । मां भगवती की दस महाविद्याओं की कृपा से साधक की समस्त बाधाएँ नष्ट हो जाती हैं। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है । इन दस महाविद्या की साधना करके मनुष्य इस जीवन को तो सुधारता ही लेता है परन्तु परलोक को भी सुधार लेता है। 

:- रजत द्विवेदी