शक्तिस्वरूपा माता दुर्गा से ही ये पूरा ब्रह्मांड चलायमान है.... मां को ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी ध्याते हैं... जब जब भक्तों पर विपदा आई, मां ने अपने विभिन्न रूपों में प्रकट होकर भक्तों की रक्षा कर अपनी ममता लुटायी ... जगत जननी माता दुर्गा की पूजा अर्चना के लिए पुराणों में कई विधियां बताई गई हैं... लेकिन कन्या पूजन के बिना मां की पूजा अधूरी मानी गयी है ।
देवी भागवत महापुराण के अनुसार नवरात्रि में भगवती दुर्गा जप-हवन-दान से उतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से होती हैं। कन्या पूजन से मां जगदम्बा भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं... चाहे वो कामना लौकिक हो या पारलौकिक। इसलिए नवरात्रि में कलश स्थापना, व्रत, दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ-साथ कन्या पूजन को भी अनिवार्य माना गया है।
देवी भागवत पुराण के अनुसार कन्या पूजन के लिए कन्याओं की उम्र 2 से 10 साल तक होनी चाहिए। कन्या पूजन नवरात्रि में कभी भी किया जा सकता है लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन करना श्रेष्ठ बताया गया है। कन्या को आदिशक्ति माता दुर्गा का ही स्वरूप माना गया है और विभिन्न आयु की कन्याएं भगवती के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाती हैं।
2 वर्ष की कन्या को 'मां कुंआरी' का स्वरूप माना जाता है।
3 वर्ष की कन्या को 'देवी त्रिमूर्ति'
4 वर्ष की कन्या को 'देवी कल्याणी
5 वर्ष की कन्या को 'देवी रोहिणी'
6 वर्ष की कन्या को 'मां कालिका'
7 वर्ष की कन्या को 'मां चंडिका'
8 वर्ष की कन्या को 'मां शाम्भवी/महागौरी'
9 वर्ष की कन्या को 'मां दुर्गा'
और 10 वर्ष की कन्या को 'देवी सुभद्रा' का स्वरूप माना जाता है।
आदिशक्ति मां दुर्गा की प्रसन्नता के लिए कन्या पूजन विधिपूर्वक करना चाहिए। कन्या पूजन की विधि इस प्रकार है....
करुणामयी मां दुर्गा का ध्यान करते हुए कन्याओं को आमंत्रित करें
दो बालकों को भी आमंत्रित करें जो हनुमान जी और भैरव बाबा के प्रतीक होते हैं
स्वच्छ स्थान पर बैठाकर उनके चरण धोएं और उनका आशीर्वाद लें
सभी कन्याओं को माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं
पुष्प अर्पित कर चुनरी ओढ़ाएं और फिर श्रद्धा भाव से भोजन कराएं
भोजन के बाद कन्याओं को उनके उपयोग के उपहार और दक्षिणा दें
मन ही मन किसी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें और सम्मान से विदा करें
कन्याओं के रूप में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा करने से धन-वैभव, स्वास्थ्य, सौभाग्य आदि की प्राप्ति होती है । सनातन धर्म में नारी को शक्ति का ही रूप माना गया है। कन्या पूजन पूरे मानव जाति को नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा भी देता है... नारियों के राजनीतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के अवसर देने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा के लिए भी समाज को हमेशा तत्पर रहना चाहिए तभी कन्या पूजन सही मायने में सार्थक होगा। नवरात्रि पूजन और व्रत-हवन का पूर्ण फल प्राप्त करने का भी इससे मार्ग खुलेगा ।
:- आस्था मीनाक्षी